भारत में क्रिप्टोकरेंसी का बाजार जितनी तेजी से पैर पसार रहा है, सरकार की निगरानी भी उतनी ही सख्त होती जा रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) के पास 49 क्रिप्टो एक्सचेंजों ने पंजीकरण कराया है, लेकिन इन प्लेटफार्मों पर संदिग्ध लेनदेन की जांच ने हवाला, जुआ और यहां तक कि टेरर फंडिंग जैसे ‘गंभीर’ अपराधों की पोल खोल दी है।
एक आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2025 तक कुल 49 वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (वीडीए एसपी) ने रिपोर्टिंग संस्थाओं के रूप में एफआईयू के साथ पंजीकरण किया। इनमें से 45 एक्सचेंज भारत में स्थित हैं, जबकि चार विदेशी हैं। भारत ने अन्य देशों के विपरीत, मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग के जोखिमों से निपटने के लिए वित्त मंत्रालय के तहत एफआईयू को एकल-बिंदु प्राधिकरण नामित किया है।
एक्सचेंजों द्वारा जमा की गई संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट (एसटीआर) का जब “रणनीतिक विश्लेषण” किया गया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट में पाया गया कि क्रिप्टो फंड्स का “दुरुपयोग” हवाला लेनदेन, ऑनलाइन जुआ, घोटाले और धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।
एजेंसी ने कुछ बेहद संवेदनशील ‘रेड फ्लैग’ भी चिन्हित किए हैं। इनमें बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम), डार्क नेट सेवाओं और आतंकवादी वित्तपोषण (टेरर फाइनेंसिंग) से जुड़े मामले शामिल हैं, जो यह दर्शाते हैं कि गंभीर आपराधिक गतिविधियों के लिए क्रिप्टो संपत्तियों का शोषण बढ़ रहा है।
नियमों की अनदेखी करने वालों पर सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान ‘गैर-अनुपालन’ करने वाले कुछ क्रिप्टो एक्सचेंजों पर कुल 28 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। गौरतलब है कि कानूनी भाषा में क्रिप्टोकरेंसी को ‘वर्चुअल डिजिटल एसेट’ (वीडीए) कहा जाता है। 2023 में इन एक्सचेंजों को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के दायरे में लाया गया था। इसके तहत उन्हें न केवल संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्ट करनी होती है, बल्कि अपने बैंक खातों का खुलासा करना, आंतरिक ऑडिट लागू करना और केवाईसी (केवाईसी) नियमों का कड़ाई से पालन करना भी अनिवार्य है।
रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि भारत में क्रिप्टो परिदृश्य तेजी से विकसित हो रहा है और यह वित्तीय क्षेत्र को बदलने की क्षमता रखता है। हालांकि, इसकी वैश्विक पहुंच, पीयर-टू-पीयर लेनदेन की क्षमता और गोपनीयता के कारण मनी लॉन्ड्रिंग का जोखिम भी अधिक है। संदिग्ध गतिविधियों के विश्लेषण में एक विशेष क्षेत्रीय एकाग्रता भी पाई गई है, जो जांच एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है।

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