जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत के दौरान स्वास्थ्य को लेकर उठे सवालों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने वांगचुक की शिकायतों को गंभीर मानते हुए विशेषज्ञ डॉक्टर से उनकी मेडिकल जांच कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट का यह आदेश ऐसे समय आया है, जब वांगचुक राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत बंद हैं।
जेल डॉक्टर नहीं, विशेषज्ञ डॉक्टर की जरूरत
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि बार-बार सामान्य जांच होना काफी नहीं है। अदालत ने माना कि वांगचुक को विशेषज्ञ डॉक्टर की जांच की जरूरत है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि किसी सरकारी अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराई जाएगी और रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपी जाएगी।
क्यों हिरासत में हैं सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई लद्दाख में छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद की गई थी, जिनमें चार लोगों की मौत और करीब 90 लोग घायल हुए थे। सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने हिंसा को भड़काया। एनएसए के तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है, हालांकि इसे पहले भी रद्द किया जा सकता है।

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