केवल एक जिले में बचा है माओवादियों का प्रभाव
विधानसभा में कांग्रेस विधायक ताराप्रसाद बाहिनीपति ने सीएम से सवाल पूछा था। इसके जवाब में मुख्यमंत्री मांझी ने कहा कि वर्तमान में केवल कंधमाल जिला ही केंद्र के सुरक्षा संबंधी व्यय योजना के तहत आता है। यहां भी अब कुछ ही नक्सली ही बचे हैं।
हालांकि, जमीनी हकीकत को साफ करते हुए सीएम ने कहा कि राज्य के अन्य हिस्सों से नक्सलवाद का लगभग सफाया हो चुका है। वर्तमान में केवल कंधमाल, कालाहांडी और रायगढ़ जिलों की सीमाओं पर लगभग 15 माओवादी सक्रिय हैं। इनके अलावा राज्य के किसी भी अन्य हिस्से में उनकी मौजूदगी नहीं है।
सरेंडर नीति का दिख रहा है असर
सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का असर धरातल पर दिखने लगा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, साल 2024 से 15 मार्च 2026 के बीच कुल 96 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ा है। भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए ओडिशा सरकार व्यापक सुविधाएं दे रही है। आत्मसमर्पण करने वालों नक्सलियों को वित्तीय सहायता के साथ-साथ घर भी दिया जा रहा है। सीएम मांझी ने कहा कि सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के दम पर ओडिशा के जंगलों से माओवाद का नामोनिशान मिट जाएगा।
No Comments: