देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की ओर से दिसंबर में बड़े पैमाने पर उड़ानों को रद्द करने और लाखों यात्रियों को परेशानी में डालने के मामले में विमानन नियामक डीजीसीए की कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है। पायलट्स की संस्था ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट’ (एफआईपी) ने नियामक की ओर से लगाए गए 22.20 करोड़ रुपये के जुर्माने को ‘बेहद मामूली’ बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है। एफआईपी ने कहा है कि यात्रियों और विमान की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता और न ही इसका व्यापार किया जा सकता है।
डीजीसीए ने क्या कार्रवाई की है?
डीजीसीए ने कुल 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इसमें से 20.40 करोड़ रुपये का जुर्माना 5 दिसंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 तक यानी 68 दिनों के गैर-अनुपालन के लिए है। यह राशि प्रति दिन 30 लाख रुपये बैठती है। पायलटों की संस्था ने इसकी तुलना अमेरिका से की है। एफआईपी ने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिकी परिवहन विभाग ने 2022 में क्रिसमस के दौरान उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के उल्लंघन के लिए साउथवेस्ट एयरलाइंस पर 14 करोड़ डॉलर (लगभग 1,160 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया था और वह राशि प्रभावित यात्रियों में बांटी गई थी।
एफआईपी ने जांच पर क्यों उठाया सवाल?
डीजीसीए के अनुसार, 3 से 5 दिसंबर के बीच 2,507 उड़ानें रद्द हुईं और 1,852 उड़ानें लेट हुईं, जिससे 3 लाख से अधिक यात्री प्रभावित हुए। हालांकि, एफआईपी ने जांच की अवधि पर सवाल उठाए हैं। रंधावा का दावा है कि रद्दीकरण 2 दिसंबर से शुरू होकर 15 दिसंबर तक चला और उसके बाद भी जारी रहा, लेकिन जांच रिपोर्ट में केवल 3 से 5 दिसंबर का जिक्र है।
एफडीटीएल और सुरक्षा से खिलवाड़ का आरोप क्यों
विवाद की मुख्य वजह ‘फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन’ यानी पायलटों के ड्यूटी और आराम के घंटे हैं। डीजीसीए ने व्यवधान का मुख्य कारण “परिचालन पर अधिक जोर” और सिस्टम सॉफ्टवेयर में कमियों को बताया है। रंधावा ने तीखा सवाल करते हुए कहा, “आप जुर्माने के बदले एफडीटीएल का सौदा नहीं कर सकते। क्रू के लिए ड्यूटी और आराम के नियम यात्रियों और उड़ान की सुरक्षा के लिए होते हैं।” उन्होंने यह भी पूछा कि अगर विमान, पायलट और केबिन क्रू उपलब्ध थे, तो उड़ानों को डिस्पैच क्यों नहीं किया गया?। गौरतलब है कि डीजीसीए ने इंडिगो को नए एफडीटीएल नियमों का पालन करने के लिए 10 फरवरी तक का समय दिया है। नियामक ने एयरलाइन के विंटर शेड्यूल में 10 प्रतिशत की कटौती की है।
अब आगे क्या?
इंडिगो का यह संकट भारतीय विमानन क्षेत्र में क्षमता और नियामक तैयारी के बीच की खाई को उजागर करता है। जहां एक तरफ डीजीसीए ने कार्रवाई कर एक मिसाल कायम करने की कोशिश की है, वहीं उद्योग के विशेषज्ञों और पायलटों का मानना है कि इतनी बड़ी अव्यवस्था के लिए यह सजा नाकाफी है। अब देखना होगा कि क्या एयरलाइन 10 फरवरी की समय सीमा तक अपनी व्यवस्थाओं को सुचारू कर पाती है या नहीं।

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