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Venezuela: कभी चीन और जापान से अमीर वेनेजुएला कंगाल कैसे हो गया, पढ़िए अर्श से फर्श तक पहुंचने की पूरी कहानी

Venezuela Crisis Story: अमेरिकी सेना द्वारा निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला चर्चा में है। दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाला यह देश अमीर से कंगाल कैसे बना? पढ़ें अर्श से फर्श तक की पूरी कहानी।

3 जनवरी 2026 की सुबह अमेरिकी सेना के ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ ने वैश्विक भू-राजनीति में भूचाल ला दिया है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी न केवल एक राजनीतिक घटना है, बल्कि यह आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक पतन का एक निर्णायक मोड़ भी है। दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार (300 बिलियन बैरल) होने के बावजूद, वेनेजुएला की 80% अर्थव्यवस्था पिछले एक दशक में कैसे खत्म हो गई? कभी ‘ब्यूटी क्वीन्स’ और पेट्रो-डॉलर के लिए मशहूर यह देश भुखमरी के कगार पर कैसे पहुंचा? इस एक्सप्लेनर में हम आंकड़ों और इतिहास के जरिए इस पूरी पहेली को सुलझा रहे हैं।

सवाल: वेनेजुएला पूरी दुनिया के चर्चा के केंद्र में क्यों है? 

जवाब: 3 जनवरी, 2026 को अमेरिकी डेल्टा फोर्स ने एक विशेष अभियान के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को काराकस से गिरफ्तार कर लिया है। अमेरिका ने उन पर ‘नार्को-टेररिज्म’ (मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद) के आरोप लगाए हैं। इसे 1989 में पनामा के तानाशाह मैनुअल नोरिएगा की गिरफ्तारी की ही तरह का एक ऐतिहासिक सैन्य हस्तक्षेप माना जा रहा है।

 

सवाल: मादुरो की गिरफ्तारी वैश्विक बाजार के लिहाज से क्यों महत्वपूर्ण है?

जवाब: ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में एक अजीब उत्साह है। वेनेजुएला के जो सॉवरेन बॉन्ड्स 2017 के डिफॉल्ट के बाद रद्दी के भाव मिल रहे थे, उनकी कीमतों में मादुरो की गिरफ्तारी के बाद 20% से 40% तक का उछाल आया है। निवेशकों का गणित यह है कि अमेरिका समर्थित नई सरकार के गठन से वेनेजुएला के लगभग 150 अरब डॉलर से 170 अरब डॉलर के भारी-भरकम कर्ज का पुनर्गठन (Restructuring) संभव हो सकेगा और अमेरिकी तेल कंपनियां देश में वापसी कर सकेंगी।

सवाल: क्या वेनेजुएला हमेशा से आर्थिक संकट में था?

जवाब: बिल्कुल नहीं। वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका के उत्तरी तट पर स्थित देश है जिसकी आबादी लगभग 3 करोड़ है। इस देश का आकार कैलिफोर्निया से लगभग दोगुना है। 20वीं शताब्दी के शुरुआती वर्षों में वेनेजुएला अपने तेल भंडारों के कारण दक्षिण अमेरिका का सबसे धनी देश माना जाता था। 1950 से 1980 के दशक के बीच वेनेजुएला की कहानी किसी सपने जैसी थी। ़1950 में वेनेजुएला की प्रति व्यक्ति आय (GDP per capita) चीन से 12 गुना, जापान से चार गुना और चिली से दो गुना अधिक थी। वेनेजुएला को तेल की कमाई इतनी ज्यादा थी कि इसे वेनेजुएला सौदीता (सऊदी वेनेजुएला) कहा जाता था। उस दौर में यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर और जीवन स्तर का मुकाबला पश्चिम जर्मनी से किया जाता था।

अमेरिका समेत विदेशी कंपनियों ने वेनेजुएला के तेल उत्पादन में भारी निवेश किया और वहां की राजनीति में भी उनकी अहम भूमिका रही। हालांकि, अमेरिकी विरोध के बावजूद, वेनेजुएला के नेताओं ने अपने मुख्य निर्यात संसाधन पर अधिक नियंत्रण स्थापित करना शुरू कर दिया। 1960 में पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) के गठन में वेनेजुएला की अहम भूमिका थी और 1976 में इसने अपने तेल उद्योग के बड़े हिस्से का राष्ट्रीयकरण कर दिया। इससे एक्सॉनमोबिल जैसी अमेरिकी कंपनियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा और अमेरिका के साथ इसकी अदावत बढ़ती चली गई।

हालांकि सरकार के फैसले से अधिकांश वेनेजुएलावासियों को आर्थिक समृद्धि नहीं मिली। तेल उद्योग के कुप्रबंधन के कारण ऋण संकट शुरू हुआ और 1988 में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) को हस्तक्षेप करना पड़ा। फरवरी 1989 में कराकस में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे और सरकार ने विद्रोह को कुचलने के लिए सेना भेजी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार , लगभग 300 लोग मारे गए, लेकिन वास्तविक संख्या इससे दस गुना अधिक होने के दावे किए गए। इसके बाद, वेनेजुएला का समाज अमीर वर्ग (जो अमेरिका के साथ काम करना चाहता था) और श्रमिक वर्ग (जो अमेरिका से स्वायत्तता चाहता था) के बीच दूरियां बढ़ गई। यह विभाजन तब से वेनेजुएला की राजनीति की पहचान बन गया है।

सवाल: तेल के अलावा वेनेजुएला की ‘सॉफ्ट पावर’ क्या थी?
जवाब:
 तेल के बाद वेनेजुएला की दूसरी सबसे चर्चित खासियत उसकी सुंदरता थी। वेनेजुएला के पास 7 ‘मिस यूनिवर्स’ और 6 ‘मिस वर्ल्ड’ खिताब हैं, जो एक विश्व रिकॉर्ड है। यह उद्योग देश की अर्थव्यवस्था और प्रतिष्ठा से इतना जुड़ा था कि 1981 की मिस यूनिवर्स आइरीन साएज (Irene Sáez) बाद में एक सफल मेयर बनीं और उन्होंने 1998 में राष्ट्रपति चुनाव भी लड़ा। सौंदर्य प्रतियोगिताएं वहां सामाजिक रूतबे और गरीबी से बाहर निकलने का एक बड़ा जरिया थीं।

सवाल: ह्यूगो शावेज कौन थे? उनके दौर में राजनीतिक हालात कैसे बदले?
जवाब: ह्यूगो शावेज आधुनिक वेनेजुएला के इतिहास के सबसे प्रभावशाली और विवादित व्यक्ति थे। वह एक पूर्व पैराट्रूपर और लेफ्टिनेंट कर्नल थे। उन्होंने 1999 से 2013 (अपनी मृत्यु तक) वेनेजुएला पर शासन किया। उन्होंने देश में ‘बोलिवेरियन क्रांति’ की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य समाजवाद के जरिए गरीबों को सशक्त बनाना और अमेरिकी प्रभाव को चुनौती देना था।

अप्रैल 2002 में लाखों विपक्षी प्रदर्शनकारियों के सड़कों पर उतरने के बाद , चावेज को कुछ समय के लिए सत्ता से बेदखल कर दिया गया। यह तख्तापलट असंतुष्ट सैन्य अधिकारियों और विपक्षी नेताओं द्वारा किया गया था, जिन्होंने व्यवसायी पेड्रो कारमोना को नया राष्ट्रपति बना दिया। चावेज़ को गिरफ्तार कर लिया गया, बुश प्रशासन ने तुरंत कारमोना को राष्ट्रपति के रूप में मान्यता दे दी, और न्यूयॉर्क टाइम्स के संपादकीय पृष्ठ ने एक “तानाशाह बनने की चाह रखने वाले” के पतन का जश्न मनाया । हालांकि, महज दो दिन बाद ही, सड़कों पर उमड़ी भारी संख्या में समर्थकों की बदौलत चावेज़ सत्ता में वापस आ गए। और असफल तख्तापलट में अपनी संभावित भूमिका के लिए बुश प्रशासन को तुरंत गहन जांच का सामना करना पड़ा। हालांकि अमेरिका ने संलिप्तता से इनकार किया, लेकिन कई वर्षों तक यह सवाल बना रहा कि क्या सरकार को तख्तापलट की पहले से जानकारी थी और उसने मौन रूप से चावेज़ को सत्ता से हटाने में सहयोग दिया था।

शावेज के दौर में तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। इससे देश में प्रति व्यक्ति आय अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई। शावेज शासन के शुरुआती दौर में देश में प्रति व्यक्ति आय 3200 डॉलर के करीब थी। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि के कारण 2013 तक देश की प्रति व्यक्ति आय 12500 डॉलर तक पहुंच गई। हालांकि इस दौरान देश की जीडीपी वृद्धि दर में उठा-पटक का दौर जारी रहा।

शावेज ने तेल से होने वाली कमाई का इस्तेमाल गरीबों के लिए व्यापक सामाजिक योजनाओं पर किया, लेकिन उन्होंने भविष्य के लिए निवेश नहीं किया। सबसे बड़ी गलती तेल उद्योग के प्रबंधन में हुई। नतीजा हुआ 2002-03 की हड़ताल। जब सरकारी तेल कंपनी PDVSA के कर्मचारियों ने हड़ताल की, तो शावेज ने 18,000 से अधिक अनुभवी इंजीनियरों, भूवैज्ञानिकों और मैनेजरों को नौकरी से निकाल दिया। उनकी जगह राजनीतिक वफादारों को भर्ती किया गया जिन्हें तेल निकालने का तकनीकी ज्ञान नहीं था। इससे वेनेजुएला की तेल उत्पादन क्षमता स्थायी रूप से अपंग हो गई, भले ही उस समय तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं। शावेज के दौर में तेल की कीमतों में 660% की वृद्धि हुई। सरकार को अरबों डॉलर मिले। तेल पर निर्भरता ़1999 के 80% से बढ़कर 2012 में 95% हो गई। इसके कारण कृषि और विनिर्माण क्षेत्र की अनदेखी की गई। जब 2014 में तेल की कीमतें गिरीं, तो देश के पास आय का कोई दूसरा स्रोत नहीं बचा था।

सवाल: निकोलस मादुरो कौन हैं? उनके कार्यकाल में अर्थव्यवस्था क्यों ठप पड़ गई?

जवाब: निकोलस मादुरो वेनेजुएला 3 जनवरी तक वेनेजुएला के राष्ट्रपति थे। जिन्हें अमेरिका ने उनके घर से बंधक बना लिया। शावेज के बाद 2013 में निकोलस मादुरो ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति की कमान संभली थी। ट्रेड यूनियन नेता मादुरो 2000 में नेशनल असेंबली के लिए चुने गए और जल्दी ही चावेज के करीबी लोगों में शामिल हो गए। वे 2012 में उपराष्ट्रपति के पद तक पहुंचे और अगले वर्ष चावेज की मृत्यु के बाद, उन्होंने बेहद कम अंतर से अपना पहला चुनाव जीता। लेकिन मादुरो, चावेज नहीं थे। उन्हें श्रमिक वर्ग, सेना या पूरे क्षेत्र में चावेज जैसा समर्थन नहीं था। दूसरी तरफ अमेरिका का दबाव बढ़ता जा रहा था। ओबामा और ट्रंप के पहले कार्यकाल दोनों में वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगाए गए, और अमेरिका और उसके सहयोगियों ने 2018 के चुनाव और फिर 2024 के चुनाव में मादुरो की जीत को मान्यता देने से इनकार कर दिया। दुनिया से अलग-थलग पड़ चुकी मादुरो की सरकार, आर्थिक रूप से एकमात्र सहारा चीन को तेल बेचने पर ही निर्भर हो गई थी ।

धीरे-धीरे वेनेजुएला की आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई और महंगाई आसमान छू गई। प्रति व्यक्ति आय फिर शावेज के दौर की शुरुआत की तरह करीब 3000 डॉलर के करीब पहुंच गई। 2014 में जब वैश्विक बाजार में तेल कीमतें गिरीं, तो वेनेजुएला के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचा। सरकार ने उस दौर में खर्च कम करने के बजाय, बेतहाशा नोट छापे। 2018 में मुद्रास्फीति दर 1,30,060% (एक लाख तीस हजार प्रतिशत) तक पहुंच गई। इसका मतलब था कि पैसे की कीमत हर कुछ घंटों में गिर रही थी। 2013 से 2025 के बीच वेनेजुएला की जीडीपी में 80% तक की गिरावट आ गई। यह आधुनिक इतिहास में (बिना युद्ध के) किसी भी देश की सबसे बड़ी आर्थिक गिरावट है, जो अमेरिका की महामंदी (The Great Depression) से भी तीन गुना बड़ी है।

सवाल: आर्थिक तंगी का सामाजिक प्रभाव क्या पड़ा?
जवाब: 
भुखमरी और गरीबी के कारण लगभग 7.7 मिलियन (77 लाख) लोग देश छोड़ गए। इसका असर सौंदर्य उद्योग पर भी पड़ा, जिसे ‘ब्यूटी ड्रेन’ कहा गया। वेनेजुएला की कई संभावित ब्यूटी क्वीन्स को अपने करियर के लिए देश छोड़ना पड़ा और उन्होंने दूसरे देशों का प्रतिनिधित्व किया। उदाहरण के लिए, वेनेजुएला में जन्मीं एंड्रिया डियाज ने ‘मिस यूनिवर्स’ में चिली का प्रतिनिधित्व किया, और जेसिका रसो ने पेरू का। जिस देश ने दुनिया को सबसे ज्यादा सुंदरियां दीं, उसकी प्रतिभाएं पलायन को मजबूर हो गईं ।

सवाल: क्या अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद सब ठीक हो जाएगा?
जवाब:
 राह आसान नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि पुनर्निर्माण का खर्च वेनेजुएला के तेल से निकाला जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत जटिल है। देश में दशकों तक तेल क्षेत्र में निवेश नहीं होने के कारण तेल कुएं और रिफाइनरियां जर्जर हालत में हैं। उत्पादन को 1 मिलियन बैरल प्रति दिन से बढ़ाकर पुराने स्तर (3 मिलियन बैरल) पर ले जाने में अरबों डॉलर और कई साल लगेंगे। वेनेजुएला पर चीन और रूस का अरबों डॉलर का कर्ज भी है, साथ ही अमेरिकी कंपनियों (जैसे ConocoPhillips) के मध्यस्थता दावे भी हैं। इन सबको सुलझाना पहली नजर में बहुत जटिल है। वेनेजुएला की राजनीतिक पर किसका दबदबा रहेगा, इसी से उसका भविष्य तय होगा।

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