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Rajya Sabha: कांग्रेस सांसद ने की दिल्ली को प्रदूषण मुक्त करने की ठोस योजना की मांग, कहा- स्थिति बेहद गंभीर

दिल्ली में प्रदूषण से लोग परेशान है। इसी बीच आज संसद में कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष ने केंद्र सरकार को प्रदूषण के मुद्दे पर घेरा। शून्यकाल में कांग्रेस सांसद रंजीत ने कहा कि प्रदूषण पर सबकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष ने गुरुवार को केंद्र सरकार को प्रदूषण के मुद्दे पर घेरने का काम किया। सुबह के समय विपक्ष के अनेक सांसद न केवल मास्क लगाकर संसद पहुंचे, बल्कि शून्य काल में इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश भी की। कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि प्रदूषण पर सबकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और एक योजना बनाकर प्रदूषण से निपटने की योजना बनानी चाहिए।

शून्यकाल में राज्यसभा में बोलते हुए कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि डॉक्टर लोगों से कह रहे हैं कि यदि लोग खर्च उठा सकते हैं तो दिवाली के बाद उन्हें दिल्ली छोड़ देना चाहिए। लेकिन क्या रेहड़ी-पटरी वाले, कमजोर आय वाले लोग यह खर्च उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली के 2.75 करोड़ लोग दिल्ली नहीं छोड़ सकते। उन्होंने कहा कि हवा को प्रकृति हमें मुफ्त उपलब्ध कराती है, लेकिन हमने इसे प्रदूषित कर दिया है। सड़क पर काम करने वाले मजदूर (प्रदूषण के मानक में) एक हजार के अंक के गंभीर प्रदूषण की स्थिति में काम कर रहे हैं। इससे उन्हें बेहद गंभीर परेशानियां हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण एक गंभीर मुद्दा है और इसके लिए यहां (संसद में) बैठा हुआ हर व्यक्ति दोषी है। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मुद्दा है और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे खिलाड़ी रही हैं। सुबह जॉगिंग करना चाहती हैं, लेकिन दिल्ली की प्रदूषित हवा इसकी अनुमति नहीं देती है। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी चिंता है क्योंकि वे भी 75 वर्ष के हो चुके हैं। लेकिन दिल्ली के सभी बच्चों-बुजुर्गों की चिंता की जानी चाहिए।

कैसे कम होगा मानव-वन्यजीवों का संघर्ष
रंजीत रंजन ने कहा कि वन्य जीवों का अधिकार छीना जा रहा है। हम लोग लगातार उनके घर यानी जंगलों में प्रवेश करते जा रहे हैं। ऐसे में मनुष्यों का वन्यजीवों से संघर्ष कम कैसे होगा। उन्होंने कहा कि मानव को कोई नुकसान होने पर उसे मुआवजा देने की बात कही जाती है। लेकिन क्या ऐसी कोई चिंता  वन्य जीवों को नुकसान होने के बाद की जाती है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लाखों पेड़ काटे जा रहे हैं। उनमें लाखों की संख्या में अनेक वन्यजीव रहते हैं। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार के पास इन वन्य जीवों को कहीं स्थानांतरित करने और उन्हें घर देने की कोई योजना है। उन्होंने कहा कि यह जानकारी देनी चाहिए कि वन्यजीवों का घर छीनने के बाद कितने वन्य जीवों की मौत हुई है।

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