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Delhi Blast: ‘तुम्हें आत्मघाती हमला करना है…’, पाकिस्तानी हैंडलर ने उमर का कर दिया था ब्रेनवॉश; दो नए खुलासे

दिल्ली में लाल किला के पास बम धमाका करने की प्लॉनिंग कई दिनों पहले पाकिस्तानी हैंडलर के कहने पर हमलावर डॉ. उमर कर चुका था। सूत्रों की मानें तो 30 अक्तूबर को यूनिवर्सिटी से भागने से पहले उमर ने अपने कमरे में एक वीडियो बनाया था।

देश की राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास 10 नंबर को कार ब्लास्ट को अंजाम देने वाले मास्टरमाइंड आतंकी डक्टर उमर मोहम्मद को लेकर दो नए खुलासे हुए हैं। उधर, दिल्ली धमाके के आरोपी आतंकी डॉ उमर नबी को नूंह की हिदायत कॉलोनी में कमरा उपलब्ध कराने के आरोप में एक महिला को जांच एजेंसियों ने हिरासत में ले लिया है। एजेंसी कई दिनों से नूंह में जांच कर रही हैं। 

इस मामले में अभी कई और आरोपित जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं। आरोपी महिला को हिरासत में लेने की आधिकारिक पुष्टि किसी अधिकारी ने अभी नहीं की है। वहीं हिदायत कॉलोनी से पुलिस ने बैरिकेड्स को हटा दिया है। सूत्र बताते हैं कि करीब 35 वर्षीय महिला को बीती रात एनआईए टीम ने पकड़ लिया। महिला का निकाह राजस्थान में हुआ है। 

पहला खुलासा
संभवतः अपने कमरे में 1:20 मिनट का बनाया था वीडियो

लाल किला के पास बम धमाका करने की प्लॉनिंग कई दिनों पहले पाकिस्तानी हैंडलर के कहने पर डॉ. उमर कर चुका था। सूत्रों की मानें तो 30 अक्तूबर को यूनिवर्सिटी से भागने से पहले उमर ने अपने कमरे में एक वीडियो बनाया था। मंगलवार को वायरल इस 1:20 मिनट के वीडियो में अंग्रेजी भाषा पर उसकी पकड़ काफी बेहतर सुनाई दे रही है।

अधिकारियों की मानें तो मंगलवार को वायरल हुए वीडियो सुनकर स्पष्ट है कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी हैंडलर ने उसका पूरी तरह से ब्रेनवॉश कर दिया था। उसे बताया जा चुका था कि तुम्हें आत्मघाती हमला करना है। धमाका करने से पहले बनाए गए वीडियो में चेहरे पर शिकन नहीं है।
दूसरा खुलासा
6 महीने के लिए गायब था उमर

वहीं, साथी डॉक्टरों ने बताया कि साल 2023 के दौरान लगभग 6 महीने के लिए डॉ. उमर अस्पताल से चला गया था। इस दौरान किसी को भी ये नहीं पता चला कि वह कहां गया है। साथ ही न तो यूनिवर्सिटी ने उसे नौकरी से निकाला। लगभग छह महीने बाद उसने अस्पताल लौटकर वापस से ड्यूटी जॉइन कर ली थी। जूनियर व छात्र होने के चलते ये तो किसी से पूछ नहीं सकते थे कि आखिर वो गया कहां। डॉ. उमर व मुजम्मिल के अन्य बैचमेट सीनियर डॉक्टरों को भी उसके आने-जाने की जानकारी नहीं थी।

डॉक्टर उमर को दे रखी थी यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने छूट
अल फलाह यूनिवर्सिटी का यदि व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल से कोई संपर्क नहीं था तो लाल किला पर बम धमाका करने वाले डॉ. उमर को इतनी छूट क्यों दी जा रही थी। अमर उजाला ने विवि से एमबीबीएस की पढ़ाई कर यहां अप्रेंटिस कर रहे दो डॉक्टरों से बात की। इन्होंने बताया कि डॉ. उमर शुरू से कम क्लास लेता था। वह सप्ताह में एक या दो लेक्चर और वह भी 15-20 मिनट का।

दो डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल में डॉ. उमर की ड्यूटी हमेशा शाम या नाइट शिफ्ट में लगाई जाती थी। ये शिफ्ट शाम 5 बजे से रात 12 बजे तक और रात 12 बजे से सुबह 8 बजे तक होती थी। इसके अलावा वह ड्यूटी पर नहीं आता ही था। जब भी कोई मरीज उनकी ड्यूटी टाइम में अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती होता तो उन्हें अक्सर कॉल करके ही बुलाना पड़ता था। बार-बार कॉल करने के बाद ही डॉ. उमर अस्पताल में पहुंचकर इलाज करता। कुछ मिनट रुकने के बाद अन्य सहायक स्टॉफ को निर्देश देकर वह वापस अपने कमरे में चला जाता था।

आमिर को न पछतावा, न चेहरे पर शिकन वकील
लाल किला के पास कार ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने फिदायीन मोहम्मद उमर उन नबी के सहयोगी आमिर राशिद अली को गिरफ्तार किया था। वह 10 दिनों की न्यायिक हिरासत में है। इस बीच उसके सरकारी वकील का बयान सामने आया है। उन्होंने बताया है कि राशिद के चेहरे पर न शिकन है और न ही पछतावा नजर आता है। जब उन्होंने आमिर से पूछताछ की तो उसने बताया कि धमाके में इस्तेमाल गाड़ी का रजिस्टर्ड मालिक है।

अल फलाह विवि के कई कर्मचारी छुट्टी पर जा रहे
दिल्ली धमाके के बाद से सुरक्षा जांच एजेंसी अल फलाह यूनिवर्सिटी में लगातार जांच कर रही है। इससे यूनिवर्सिटी के छात्र और कर्मचारियों में संशय है। मंगलवार को यूनिवर्सिटी के कई कर्मचारी गाड़ियों में अपने सामान के साथ यहां गेट से निकलते दिखे। यूनिवर्सिटी सूत्रों की माने तो वे छुट्टी लेकर अपने-अपने घर लौट रहे हैं।

अस्पताल की ओपीडी में घटी मरीजों की संख्या
अल फलाह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के तार आतंक और दिल्ली बम धमाके से जुड़ने के बाद मरीजों की संख्या में भी कमी देखी गई है। पहले अस्पताल में लगभग 200 मरीजों की ओपीडी होती थी लेकिन अब 100 से भी कम हो गई है। इसी तरह अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में भी भारी गिरावट देखी गई है।

सामान्य हो रहे हालात, लगातार घरों को जाते रहे छात्र
धौज स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी के बाहर मंगलवार को भी सन्नाटा पसरा रहा। यूनिवर्सिटी का मुख्य द्वार बंद रहा। हालांकि, सुरक्षा और सख्ती में पहले के मुकाबले थोड़ी ढील नजर आई। हालात सामान्य होते नजर आ रह हैं। परिसर से अंदर और बाहर जा रहे कुछ विशेष वाहनों की ही चेकिंग होती हुई नजर आई। ऑटो और अपने निजी दो पहिया वाहनों से आ रहे मरीजों को ऐसे ही जाने दिया गया।

दोपहिया वाहन और पैदल यात्रियों के लिए किनारे का छोटा सा गेट भी पूरे दिन खुला रहा। सुबह से छात्र अपने घरों को जाते हुए दिखाई दिए। सुबह करीब 9 बजे मुख्य द्वार से ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की टीम भी यूनिवर्सिटी परिसर में पहुंची। मंगलवार की स्थिति को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि बीते दिनों के के मुकाबले छात्र और आसपास के लोग धीरे-धीरे थोड़ा सहज नजर आ रहे हैं।

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