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PM Modi Manipur Visit: पीएम मोदी के संभावित दौरे का कुकी संगठनों ने किया स्वागत, लेकिन इस फैसले पर जताई आपत्ति

मणिपुर हिंसा के बीच पीएम मोदी के 13 सितंबर के संभावित दौरे का कुकी-जो संगठनों ने स्वागत किया, लेकिन स्वागत समारोह में नृत्य कार्यक्रम पर आपत्ति जताई। संगठनों ने कहा कि घाव अभी भरे नहीं, आंसू सूखे नहीं, हम कैसे नाचें? उन्होंने पीएम मोदी से राहत शिविरों में रह रहे पीड़ितों से मिलने और स्थायी राजनीतिक समाधान की मांग की।

मणिपुर में दो साल से जारी हिंसा के बीच पीएम नरेंद्र मोदी 13 सितंबर को मणिपुर के दौरे पर जा सकते हैं। इसको लेकर राज्यभर में तैयारियां जोरो शोरो से शुरू हो गई है। ऐसे में कुकी-जो समुदाय से जुड़ी कई संगठनों ने पीएम मोदी के इस संभावित दौरे का स्वागत किया है, लेकिन उनके स्वागत के लिए आयोजित नृत्य कार्यक्रम पर कड़ी आपत्ति जताई है। इसको लेकर इंफाल हमार डिस्प्लेस्ड कमेटी ने कहा कि पीएम को स्वागत समारोह में हिस्सा लेने के बजाय उन लोगों से मिलना चाहिए जो जातीय हिंसा के कारण विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं।

‘हम खुशी से कैसे नाच सकते हैं?’
पीएम मोदी के इस संभावित दौरे को लेकर चुराचांदपुर जिले के गैंगटे स्टूडेंट्स संगठन ने कहा कि हमारा शोक खत्म नहीं हुआ है, हमारे आंसू अभी सूखे नहीं हैं, हमारे घाव अभी भरे नहीं हैं, हम खुशी से कैसे नाच सकते हैं? संगठन ने भी कहा कि हम प्रधानमंत्री के दौरे का स्वागत करते हैं, लेकिन हम आंसुओं के साथ नृत्य नहीं कर सकते।

कुकी-जो समुदाय की मांगों पर जोर
कुकी समुदाय का शीर्ष संगठन कुकी इंपी मणिपुर ने पीएम मोदी के दौरे को लेकर कहा कि पीएम का दौरा स्वागत योग्य है, लेकिन इससे न्याय और कुकी-जो समुदाय की मांगों को पहचान भी मिलनी चाहिए। संगठन ने दोहराया कि सिर्फ अस्थायी राहत उपायों से समाधान नहीं होगा, बल्कि राजनीतिक हल जरूरी है।

मैतेई समुदाय के लोग भी जता रहे उम्मीद
दूसरी ओर पीएम मोदी के इस यात्रा को  इंफाल घाटी के मैतेई समुदाय के लोग भी अपने दुख साझा करने का मौका मान रहे हैं। इंफाल ईस्ट जिले के ग्रामीण सोइबम रीगन ने कहा कि पीएम की उपस्थिति हमारे लिए अपनी लंबे समय से चली आ रही समस्याएं साझा करने का मौका होगी।

सड़कों पर सुरक्षित आवागमन की मांग तेज
हालांकि इन सबके बीच सड़कों पर सुरक्षित यात्रा को लेकर महिला संगठन की मांग चर्चा में है। महिला संगठन ‘इमागी मेरा’ ने कहा कि प्रधानमंत्री को अधिकारियों को निर्देश देना चाहिए कि मैतेई लोगों को राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षित यात्रा की अनुमति दी जाए।

मणिपुर हिंसा में अबतक क्या हुआ?
गौरतलब है कि मई 2023 से मणिपुर में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी है। अब तक 260 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग बेघर हो चुके हैं। हालात बिगड़ने पर केंद्र सरकार ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया और मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया। विधानसभा को सस्पेंडेड एनिमेशन में रखा गया है, जबकि उसकी अवधि 2027 तक है।

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