header advertisement

मां-बाप के निधन पर भी विदेश से नहीं आते बच्चे: सांसद का सुझाव- ऐसे लोगों से लें माता-पिता की देखभाल का हलफनामा

राज्यसभा में भाजपा सांसद राधा मोहनदास अग्रवाल ने विदेश जाने वाले युवाओं के मां-बाप की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सुझाव दिया है। उन्होंने कहा जो लोग विदेश जाते है उनसे एफिडेविट लिए जाएं।

आज राज्यसभा में विदेश जाने वाले लोगों को लेकर एक सुक्षाव दिया गया। भाजपा सांसद राधा मोहनदास अग्रवाल ने इस विषय को रखते हुए कहा कि विदेश जाने वालों लोगों  एफिडेविट लिए जाने चाहिए। जिससे यह सुनिश्चित किया जाए कि विदेश जाने वाले युवा अपने माता-पिता की देखभाल करेंगे और उनसे नियमित संपर्क बनाए रखेंगे।

राज्यासभा में यह मामला इसलिए उठा क्यों ऐसे कई माले सामने आते हैं, जहां विदेश जाने वाले युवा अपने माता-पिता का ख्याल नहीं रखते हैं। यहां तक कि देश में रह रहे उनके माता-पित की मृत्यु होने पर भी वे नहीं आते।

भाजपा सांसद ने देश में रह रहे माता-पिता की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए बताया कि देश के करीब साढ़े तीन करोड़ लोग विदेशों में रहते हैं और एक बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनके माता-पिता भारत में हैं। कई बार माता-पिता अपना सब कुछ बेचकर अपने बच्चों को विदेश पढ़ने या नौकरी करने भेजते हैं।

राधा मोहनदास अग्रवाल ने सदन को बताया कि कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां विदेश में रहने वाले बच्चों ने अपने माता-पिता की देखभाल नहीं की। उन्होंने इंदौर और दिल्ली की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि कुछ माता-पिता की मृत्यु के बाद भी उनके बच्चे वापस नहीं आए, जिससे उनका अंतिम समय अकेलेपन में बीता। सरकारी कानून, जैसे मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट, 2007, अभी भी पूरी तरह प्रभावी नहीं है।

उन्होंने राज्यसभा में सुझाव दिया कि विदेश जाने वाले लोगों से एफिडेविट लिया जाए, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाए कि वे अपने माता-पिता की देखभाल करेंगे, हेल्थ इंश्योरेंस करेंगे और नियमित संपर्क बनाए रखेंगे। भाजपा सांसद ने यह भी कहा कि अगर ऐसा प्रमाण हर छह महीने में नहीं मिलता, तो भारत सरकार को उनके पासपोर्ट निरस्त करने और उन्हें वापस बुलाने का अधिकार होना चाहिए।

भाजपा सांसद राधा मोहनदास अग्रवाल ने कहा मैं आपको इंदौर की एक घटना बताऊंगा। कुछ दिन पहले एक ऐसे व्यक्ति के पिता की मौत हो गई और 20 दिन बाद उसकी मां की मौत हो गई। दोनों मां-बाप का शरीर सड़ता गया, गलता गया, पर उनके बच्चे कभी लौटकर उनके पास नहीं आए। दिल्ली में भी ऐसी ही घटनाएं हुई हैं। आंकड़े बताते हैं कि ऐसी करीब 500 घटनाएं देश में हुई हैं, जहां लोगों के बच्चे विदेश में हैं। लेकिन अंतिम काल में भी वे नहीं आए।

उन्होंने कहा कि मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट करीब-करीब एक दन्तहीन एक्ट था। मां-बाप अगर कोर्ट में जाकर कहेंगे तब उनको सुविधा मिलेगी। उन्होंने विदेश मंत्री से आग्रह करते हुए कहा जो लोग विदेश जाते हैं, उनसे एक एफिडेविट लिया जाए कि वे विदेश जाने के बाद अपनी आय का एक निश्चित हिस्सा मां-बाप की देखभाल के लिए अवश्य दें। मां-बाप के हेल्थ इंश्योरेंस का प्रावधान करें और कम से कम हफ्ते में एक बार अपने मां-बाप से फोन पर बात जरूर करें।

उन्होंने कहा कि यह भी प्रावधान किया जाना चाहिए कि हर 6 महीने में एक सर्टिफिकेट लिया जाए, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित हो और अगर कोई ऐसा नहीं करता है तो भारत सरकार को उसका पासपोर्ट निरस्त करना चाहिए और उन्हें वापस भारत में बुला लेना चाहिए।

Next Post

No Comments:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

sidebar advertisement

National News

Politics