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‘भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना’ पर उठे सवाल, जरुरत 13500 करोड़ की, मिले 9831 करोड़

कांग्रेस पार्टी के पूर्व सैनिक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल रोहित चौधरी ने सीएजी रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि सेना में जवानों की कमी है। दूसरा उन्होंने 'भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना' को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है।

कांग्रेस पार्टी के पूर्व सैनिक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल रोहित चौधरी ने सीएजी रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि सेना में जवानों की कमी है। दूसरा उन्होंने ‘भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना’ को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। चौधरी ने शुक्रवार को एक प्रेसवार्ता में यह सवाल उठाया है, क्या तबाही के कगार पर खड़ी है ‘भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना’। साल 2023-24 में इस योजना के लिए 13500 करोड़ रुपये की जरुरत थी, जबकि सरकार ने केवल 9831 करोड़ रुपये ही जारी किए। नतीजा, विभिन्न एम्पेन्ल्ड अस्पतालों  में एक वर्ष से ज्यादा की अवधि के बिल पेंडिंग हैं। इसके चलते भूतपूर्व सैनिकों को इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एम्पेन्ल्ड अस्पताल, इलाज में ना-नुकर करने लगे हैं।

कर्नल रोहित चौधरी ने बताया, सेना में जवानों की कमी है, इसलिए जल्द से जल्द इसे पूरा किया जाए। ‘भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना’ की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा। इस योजना के तय बजट जारी नहीं किया जा रहा। इसके अलावा, 2023-24 में कैरीफॉरवर्ड लायबिलिटी (सीएफएल) करीब 3500 करोड़ रुपए थी, जो 2024-2025 में 5400 करोड़ रुपए हो गई है। यही सीएफएल अब 2025-2026 में 6000 करोड़ रुपए होगी।

कांग्रेस पार्टी के पूर्व सैनिक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल रोहित चौधरी के अनुसार, अगर बजट में 8000 करोड़ रुपए का आवंटन किया जाएगा तो पिछले साल के बिल को लिक्विडेट करने में ही 6000 करोड़ रुपए खर्च हो जाएंगे। ऐसे में सिर्फ 2000 करोड़ रुपए ही बचेंगे। इससे स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। इन परिस्थितियों में इस साल 14000 करोड़ रुपए की जरूरत होगी, लेकिन अगर यह बजट आवंटित नहीं किया जाएगा तो ‘भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना’ का ढांचा पूरी तरह से बैठ जाएगा। एम्पेन्ल्ड अस्पताल, भूतपूर्व सैनिकों को इलाज के लिए अपने यहां पर स्वीकार नहीं कर रहे।

कांग्रेस पार्टी के गोवा से सांसद कैप्टन विरियाटो ने बाकायदा इस मुद्दे को संसद में उठाया है।

कई दूसरे साथियों और संगठनों के द्वारा, रक्षा मंत्रालय एवं प्रधानमंत्री के संज्ञान में भी इस बात को लाया गया है। कई पत्र लिखे गए, लेकिन भूतपूर्व सैनिक वेलफेयर के डायरेक्टर सुनने को तैयार नहीं हैं। एम्पेन्ल्ड अस्पतालों में लंबे समय से बिल पेंडिंग हैं। इसके चलते अब वे भूतपूर्व सैनिकों को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। कई जगहों पर दवाओं की उपलब्धता नहीं है। खुद के पैसों से खरीदी हुई दवाइयों का रिम्ब्रशमेंट  साल-साल तक नहीं होता।

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