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पुणे पोर्श कार दुर्घटना: आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, महाराष्ट्र सरकार को जारी किया नोट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र सरकार से पुणे पोर्श कार दुर्घटना मामले में दो आरोपियों द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर जवाब मांगा, जिसमें मई 2024 में दो लोगों की जान चली गई थी। आदित्य अविनाश सूद (52) और आशीष सतीश मित्तल (37) को पिछले साल 19 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था, क्योंकि दुर्घटना में शामिल दो नाबालिगों की जगह उनके खून के सैंपल जांच के लिए इस्तेमाल किए गए थे।

बता दें कि 19 मई, 2024 को पुणे के कल्याणी नगर इलाके में एक पोर्श कार ने दो लोगों को कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। हादसे के वक्त कार कथित तौर पर शराब के नशे में एक 17 साल का लड़का चला रहा था।  जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयॉन की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट के जमानत याचिका खारिज करने के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। पिछले साल 16 दिसंबर को हाईकोर्ट ने इस मामले में सूद और मित्तल सहित आठ आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
कोर्ट ने कर दिया था रिहा
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग आरोपी को आसान शर्तों पर जमानत दे दी थी, जिससे पूरे देश में अक्रोश देखने को मिला था। जमानत की शर्तों में रोड सेफ्टी पर 300 शब्दों का निबंध लिखना शामिल था। फैसले की आलोचना होने के बाद पुणे पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड से अपने फैसले पर फिर से विचार करने के लिए संपर्क किया। इसके बाद बोर्ड ने आदेश में बदलाव किया और नाबालिग को ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया। जून में हाईकोर्ट ने नाबालिग को रिहा करने का आदेश दिया था।

आदित्य सूद ने अल्कोहल परिक्षण में धोखा देने की कोशिश की
आदित्य सूद उन 10 लोगों में शामिल थे, जिन्हें किशोर चालक के अल्कोहल परीक्षण को रद्द करने के लिए रक्त के नमूनों की अदला-बदली के सिलसिले में गिराफ्तार किया गया था।  पुलिस के अनुसार, आदित्य सूद के रक्त के नमूने उसके पिता के रक्त के नमूनों से बदल दिए गए थे। इस मामले में पुणे के ससून जनरल अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों की भी गिरफ्तारी हुई है।। इन्होंने कथित तौर पर रक्त की अदला-बदली की इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

क्या है पूरा मामला?
पुणे शहर में 18-19 मई 2024 की दरम्यानी रात को करीब तीन करोड़ रुपये की पोर्श कार को तेज गति से दौड़ाने के चक्कर में 17 साल के लड़के ने एक बाइक को टक्कर मार दी थी। गाड़ी की टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक अपना संतुलन खोकर काफी दूर तक सड़क पर घिसटते चली गई, जिससे उस पर सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मौके पर मौजूद लोगों ने हादसे की सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद आरोपी नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस घटना के 14 घंटे बाद आरोपी नाबालिग को कोर्ट से कुछ शर्तों के साथ जमानत मिल गई थी। कोर्ट ने उसे 15 दिनों तक ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करने और सड़क दुर्घटनाओं के प्रभाव-समाधान पर 300 शब्दों का निबंध लिखने का निर्देश दिया था। बाद में विवाद बढ़ा तो कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी। हालांकि, पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी शराब के नशे में था और बेहद तेज गति से कार को चला रहा था।

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