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Gautam Gambhir: भारतीय टीम का अंधकारमय दौर! गंभीर काल के 17 अनचाहे रिकॉर्ड्स; पांच फैसले, जिनकी हो रही आलोचना

गौतम गंभीर के कार्यकाल में टीम इंडिया ने कुछ बड़े टूर्नामेंट जीते, परंतु इसके साथ टेस्ट और वनडे में ऐसे ऐतिहासिक हार देखी जो पिछले काफी समय से नहीं हुई थीं। 17 अनचाहे रिकॉर्ड्स, घर में टेस्ट व्हाइटवॉश, वनडे सीरीज में हार, कप्तानी विवाद और खिलाड़ियों की फॉर्म का पतन, इन सबने भारतीय क्रिकेट की दिशा को कठघरे में खड़ा कर दिया है। घर में न्यूजीलैंड से हार ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है कि टीम गंभीर काल में कहां खो गई?

भारतीय क्रिकेट फिलहाल एक उलझन भरे मोड़ पर खड़ा है। पिछले एक दशक में टीम इंडिया ने कई ऊंचाइयों को छुआ। भारतीय टीम आईसीसी फाइनल्स में पहुंची…दो-दो आईसीसी ट्रॉफियां जीतीं, बल्लेबाजों ने विश्व स्तरीय रिकॉर्ड्स बनाए, मजबूत गेंदबाजी के दम पर घर में टेस्ट और वनडे में रिकॉर्ड्स भी बनाए, लेकिन गौतम गंभीर के कोचिंग दौर में ऐसा लग रहा है कि मंजिल धुंधली हो गई है।टेस्ट में लगातार ऐतिहासिक हार, घर में न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों के सामने टेस्ट और वनडे में हार,, बड़े चेज चूकना, दो दशक पुराने रिकॉर्ड्स का टूटना, सब मिलाकर क्रिकेट प्रेमियों में बेचैनी बढ़ गई है। हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ घर में 1-2 से वनडे सीरीज हार, इस बहस को फिर जिंदा कर गई है।

गंभीर की देखरेख में वनडे सीरीज का रिकॉर्ड

भारत ने गंभीर की कोचिंग में अब तक पांच प्रमुख द्विपक्षीय वनडे सीरीज खेली हैं और नतीजे चौंकाने वाले हैं। भारत ने पांच में से तीन सीरीज गंवाई हैं वह भी घर में और बाहर दोनों जगह। 2023 वनडे विश्व कप के बाद इस प्रारूप में भारत का हाल खराब रहा है। यानी संतुलन टूटा हुआ है और किसी भी शीर्ष टीम के लिए यह रिकॉर्ड खतरे की घंटी है।

गंभीर के कार्यकाल में कौन-कौन सी सीरीज खेली गईं

इस दौरान भारत ने तीनों प्रारूपों में भारी उतार-चढ़ाव देखा। भारत की टेस्ट टीम, जिसे कभी घरेलू सरजमीं पर ‘अजेय दीवार’ कहा जाता था, अब लगातार हार का सामना कर रही है। न्यूजीलैंड के खिलाफ 0-3 की हार के बाद दक्षिण अफ्रीका के हाथों 0-2 की सीरीज हार ने भारतीय क्रिकेट में हलचल मचा दी। क्रिकेट विश्लेषकों, पूर्व दिग्गजों और फैंस इस हार के लिए भारतीय खिलाड़ियों के साथ-साथ कोच गंभीर को भी जिम्मेदार मान रहे हैं। कोच गंभीर प्रेस कॉन्फ्रेंस में आकर खुद पर आलोचनाओं का जवाब दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें हटाने या नहीं हटाने का फैसला बीसीसीआई के हाथों में हैं, लेकिन बोर्ड को उनकी सफलताएं नहीं भूलनी चाहिए। अब एक बड़ा सवाल है क्या भारत की टेस्ट गिरावट के लिए गौतम गंभीर जिम्मेदार हैं? इस सूची में चैंपियंस ट्रॉफी जीतना सूर्य की एक किरण की तरह दिखाई देता है, लेकिन व्यापक तस्वीर अभी भी धुंधली है।

गंभीर के दौर के 17 अनचाहे रिकॉर्ड चिंता की वजह

भारतीय क्रिकेट में कुछ रिकॉर्ड बनते हैं, कुछ बनाना कोई नहीं चाहता, लेकिन गंभीर काल में बने कुछ रिकॉर्ड्स फैंस को अंदर तक झकझोर गए। ये ऐसे रिकॉर्ड्स थे, जो भारत को अपनी सरजमीं पर मजबूत बनाते थे, लेकिन विपक्षी टीमों ने इस दीवार को ढहा दिया। मिशन 2027 वनडे विश्व कप को देखते हुए भी ये अनचाहे रिकॉर्ड्स परेशानी खड़ी करते हैं। इतिहास के इन धब्बों को नजरअंदाज करना अब मुश्किल है।

इतिहास के इन धब्बों को नजरअंदाज करना अब मुश्किल है।

फैसले जिनकी सबसे ज्यादा आलोचना हो रही है

  1. टेस्ट टीम में बार-बार बदलाव: सेट कॉम्बिनेशन गायब है। विशेषज्ञों की जगह ऑलराउंडर्स को तवज्जो दी जा रही है, जबकि टेस्ट में स्पेशलिस्ट खिलाड़ी मायने रखते हैं। पिछले एक साल में भारत ने बार-बार टीम चुनी, पिच चुनी, रणनीति बदली, पर स्थिरता कहीं नहीं दिखाई दी। पहली गलती के बाद ही खिलाड़ियों को बाहर करने की नीति ने टीम का आत्मविश्वास तोड़ दिया।
  2. सीनियर खिलाड़ियों का रिटायरमेंट विवाद: विराट कोहली, रोहित शर्मा और अश्विन ने टेस्ट को अलविदा कह दिया। फैंस ने कहा कि टीम मैनेजमेंट और कोच की ओर दबाव बनाया गया। सच्चाई क्या है कोई नहीं जानता।
  3. स्पिन अटैक में भी फुस्स हुए: भारतीय स्पिनर्स घर में भी बेरंग साबित हुए। कहा जा रहा है कि गंभीर की चाहत थी कि टेस्ट में भारत ऐसी पिचें बनाए जहां गेंद तीसरे सत्र से ही शार्प टर्न लें। लेकिन यह रणनीति बैकफायर हो गई। न्यूजीलैंड के बाद दक्षिण अफ्रीका ने इसका फायदा उठाया
  4. कप्तान बदलने की रणनीति: इसने ड्रेसिंग रूम में असंतुलन बढ़ा। चैंपियंस ट्रॉफी की कामयाबी के बाद रोहित को अचानक कप्तानी से हटाना किसी के समझ नहीं आया। साथ ही टी20 टीम में शुभमन गिल को जबरदस्ती उपकप्तान बनाकर शामिल करना भी बैकफायर कर गया।
  5. घर पर ही कमजोर बल्लेबाजी: टीम इंडिया को मध्यक्रम में अच्छे बल्लेबाज की कमी खल रही है, जो मैदान पर जम सके और गेंदबाजों को थका सकें। पारी को संभालने वाले बल्लेबाजों की कमी बार-बार सामने आ रही है। यही नतीजा है कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो टेस्ट में भारत की ओर से एक भी शतक नहीं लगा और न ही भारतीय टीम चार पारियों में एक बार भी 202 का आंकड़ा पार कर सकी। न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में भी कुछ बल्लेबाजों को छोड़कर बाकी बल्लेबाज फ्लॉप ही रहे।
  6. अनुभवी खिलाड़ियों को शामिल न करना: मोहम्मद शमी को चैंपियंस ट्रॉफी के बाद से टीम में शामिल ही नहीं किया गया है, जबकि विजय हजारे में उनका प्रदर्शन शानदार रहा था। अक्षर पटेल को वनडे टीम से ड्रॉप किया गया और वॉशिंगटन सुंदर को तरजीह दी गई। बुमराह का वर्कलोड मैनेजमेंट जारी है, जबकि विजय हजारे में वह एक मैच भी नहीं खेले। हार्दिक पांड्या को भी आराम दिया गया, जबकि वह टीम को बैलेंस देते हैं। ऋतुराज गायकवाड़, जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शानदार फॉर्म दिखाया था, उन्हें बिना किसी वजह के ड्रॉप कर दिया गया।

इन फैसलों ने टीम की दिशा में अस्थिरता पैदा की। क्रिकेट किसी मशीन की तरह है, संतुलन बिगड़ते ही परिणाम बिखरने लग जाते हैं।

तो क्या गंभीर असफल हैं?

इस सवाल का जवाब भावनाओं में नहीं, स्टैट में छिपा है। न्यूजीलैंड की ए या बी नहीं, सी टीम से भारत हारा है। कीवी टीम रचिन रवींद्र, विलियम्सन, सैंटनर, मिल्ने और मैट हेनरी के बिना आई थी, लेकिन तब भी भारत को उसके घर में हरा दिया। कई क्रिकेट पंडितों का मानना है कि चैंपियंस ट्रॉफी में भारत की जीत इस वजह से हुई थी, क्योंकि टीम बनी बनाई थी। रोहित और द्रविड़ ने वह टीम बनाई थी। टीम 2023 वनडे विश्व कप खेलने वाली टीम से मिलती जुलती थी, बस कुछ एक खिलाड़ी बदले थे। तभी जीत मुमकिन हुई, लेकिन इसके बाद बदलाव हार के कारण बने। सिर्फ चैंपियंस ट्रॉफी की जीत को छोड़ दिया जाए और टी20 के प्रदर्शन को छोड़ा जाए तो वनडे और टेस्ट में भारतीय टीम का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है।

गंभीर ने:

  • चैंपियंस ट्रॉफी जिताई।
  • इंग्लैंड को वनडे और टी20 में हराया।
  • दक्षिण अफ्रीका को वनडे और टी20 में मात दी।

लेकिन…

  • घरेलू टेस्ट में वर्चस्व टूट गया।
  • 36 और 38 साल पुराने रिकॉर्ड्स टूटे।
  • विश्व टेस्ट चैंपियनशिप छूटी।
  • SENA देशों के खिलाफ टेस्ट कमजोर साबित हुआ।
  • वनडे स्थिरता गायब दिखी।

यही विरोधाभास भारतीय क्रिकेट को उलझा रहा है। टीम बहुत अच्छी भी दिखती है और बहुत साधारण भी।

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