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IND vs NZ: क्या गेंदबाजी संयोजन पर फिर विचार करेगा भारतीय टीम प्रबंधन, इंदौर में कैसा है भारत का रिकॉर्ड?

भारतीय गेंदबाजों का प्रदर्शन दूसरे वनडे में अच्छा नहीं रहा था और कुलदीप यादव काफी महंगे रहे थे। अब दोनों टीमें इंदौर में आखिरी मुकाबले में आमने-सामने होंगी और यह देखना होगा कि टीम प्रबंधन निर्णायक मुकाबले के लिए गेंदबाजी आक्रमण में कोई बदलाव करता है या नहीं।

भारत और न्यूजीलैंड के बीच रविवार को इंदौर में तीन मैचों की वनडे सीरीज का तीसरा और निर्णायक मुकाबला खेला जाएगा। दोनों टीमों के बीच सीरीज 1-1 की बराबरी पर चल रही है। राजकोट में खेले गए दूसरे वनडे में भारतीय गेंदबाजी आक्रामण असफल रहा था और टीम का बचाव नहीं कर सकी थी। इस दौरान मध्य ओवरों में भारतीय गेंदबाों की कमजोरियां भी उजागर हुईं।

दूसरे वनडे में महंगे साबित हुए थे कुलदीप
दूसरे वनडे में भारत के लिए सबसे महंगे कलाई के स्पिनर कुलदीप यादव साबित हुए थे। न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों के सामने कुलदीप ना तो नियंत्रण बना सके और ना ही विकेट लेने का खतरा पैदा कर सके। इस मैच में शतक लगाने वाले डेरिल मिचेल ने उनकी गेंदों पर आसानी से रन बटोरे। कुलदीप की लेंथ और लाइन दोनों पर हमला किया गया, जिसमें विशेष रूप से मिचेल ने अपने पैरों का अच्छा इस्तेमाल करते हुए गेंद के टर्न को बेअसर किया और बीच के ओवरों में भारतीय रणनीति को नाकाम कर दिया। कीवी बल्लेबाजों ने कुलदीप की गेंदों को बहुत प्रभावी ढंग से स्वीप किया। यह रणनीति उनके लिए टेस्ट मैचों में भी कारगर साबित हुई थी। भारत के स्पिनर बल्लेबाजों पर लगातार दबाव नहीं बना पाए। इसके विपरीत न्यूजीलैंड के स्पिनरों ने भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर नहीं खेलने दिया।

कैसी है इंदौर की पिच?

  • इंदौर का मैदान अपनी छोटी बाउंड्री और बल्लेबाजी के अनुकूल पिचों के लिए जाना जाता है। इसलिए यहां विविधता के बजाय अनुशासित गेंदबाजी करना अधिक महत्व रखता है।
  • भारत के गेंदबाजों विशेषकर कुलदीप को गेंद को अधिक सपाट रखना होगा, स्टंप्स पर आक्रमण करना होगा और मैदान के बड़े हिस्सों का पूरी चतुराई के साथ इस्तेमाल करना होगा।
  • ऐसी पिच पर जहां गलत शॉट भी अक्सर छक्के में तब्दील हो जाते हैं, वहां लेंथ को नियंत्रित करना और चौके लगाने के विकल्पों को कम करना महत्वपूर्ण होगा।
  • होलकर स्टेडियम में उसने अपने पिछले सभी पांच मैच जीते हैं।

नीतीश को दोबारा मिलेगा मौका?
राजकोट में चोटिल वाशिंगटन सुंदर की अनुपस्थिति निस्संदेह महसूस की गई, जबकि उनके स्थान पर प्लेइंग-11 में शामिल किए गए नीतीश कुमार रेड्डी ने केवल दो ओवर ही गेंदबाजी की। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ऑफ स्पिन गेंदबाजी करने वाले आयुष बदोनी शायद नीतीश की तुलना में बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। टीम प्रबंधन स्पिन गेंदबाजी से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए तेज गेंदबाजी आक्रमण को मजबूत करने पर भी विचार कर सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि बाएं हाथ के गेंदबाज अर्शदीप सिंह को मौका दिया जाता है या नहीं। अगर अर्शदीप सिंह को टीम में दिया जाता है तो प्रसिद्ध कृष्णा को बाहर होना पड़ेगा। मोहम्मद सिराज निश्चित रूप से गेंदबाजी आक्रमण की अगुआई करेंगे, जबकि अंतिम संयोजन इस पर निर्भर कर सकता है कि क्या भारत एकमात्र स्पिन ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा मौजूदगी में एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज का विकल्प चुनता है या नहीं।

बल्लेबाजी में बदलाव की संभावना कम
जहां तक बल्लेबाजी का सवाल है तो भारत के मुख्य बल्लेबाजों में किसी तरह के बदलाव की संभावना नहीं है। कप्तान शुभमन गिल, रोहित शर्मा, विराट कोहली, केएल राहुल और श्रेयस अय्यर भारतीय टीम की रणनीति के केंद्र में बने हुए हैं। भारतीय टीम ने शुक्रवार को अभ्यास नहीं किया, जबकि न्यूजीलैंड की टीम ने वैकल्पिक सत्र होने के बावजूद जमकर पसीना बहाया।

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