एलपीजी सिलिंडर की किल्लत के बीच लोग वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत तलाश रहे हैं। ऐसे में कचरे से गैस बनाने के लिए दिल्लीवासी ओखला स्थित बायोगैस प्लांट पहुंच रहे हैं। घरेलू और व्यावसायिक (कॉमर्शियल) बायोगैस सेटअप के बारे में पूछताछ कर रहे हैं। ओखला स्थित परफेक्ट बायोगैस एंड पावर मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड की प्लांट हेड पुनीता सिंह के अनुसार, रोजाना करीब 400-500 लोग घरेलू बायोगैस प्लांट लगाने के लिए संपर्क कर रहे हैं, जबकि 50 से अधिक कॉल कमर्शियल बायोगैस सेटअप के लिए आ रही हैं। यह पहल शहरों में लैंडफिल कचरे को कम करने में भी मदद कर सकती है।
बायोगैस के बढ़ते विकल्प के मुख्य बिंदु
स्थानीय उत्पादन: गोबर, रसोई का गीला कचरा, खराब सब्जियां और फलों के छिलकों का उपयोग करके घर पर ही छोटा बायोगैस प्लांट लगाया जा रहा है।
लागत और सब्सिडी: घरेलू प्लांट की लागत लगभग 15,000 से 50,000 रुपये तक हो सकती है, जबकि कमर्शियल सेटअप में 19-20 लाख तक का खर्चा आ सकता है। वहीं, सरकार इन संयंत्रों पर सब्सिडी भी प्रदान कर रही है।
तकनीक: पोर्टेबल बायोगैस सिस्टम का उपयोग करना आसान है, जो अवायवीय पाचन के माध्यम से कचरे को मीथेन में बदलते हैं।
दोहरा लाभ: खाना पकाने की गैस के अलावा, इससे निकलने वाले अवशेष का उपयोग पौधों के लिए बेहतरीन जैविक खाद के रूप में किया जा सकता है।
क्या है बायोगैस
बायोगैस एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है, जो गोबर, कृषि अवशेष, रसोई के जैविक कचरे और अन्य जैविक पदार्थों को ऑक्सीजन रहित वातावरण में सड़ाकर तैयार की जाती है। इस प्रक्रिया को एनारोबिक डाइजेशन कहा जाता है। इसमें मुख्य रूप से मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है, जो ईंधन के रूप में उपयोगी होती है।
बायोगैस के उपयोग
बायोगैस को गैस टैंक या बैग में संग्रहित किया जाता है और इसका उपयोग खाना बनाने, पानी गर्म करने, रोशनी करने और जनरेटर चलाने के लिए किया जा सकता है। इसे शुद्ध कर बायोमीथेन में बदला जा सकता है, जिसका उपयोग परिवहन ईंधन या गैस पाइपलाइन में भी किया जा सकता है।
पर्यावरण के लिए भी फायदे
विशेषज्ञों के अनुसार बायोगैस ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करती है, जैविक कचरे के बेहतर प्रबंधन में मदद करती है और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती है। इसके साथ ही बायोगैस प्लांट से निकलने वाला अवशेष उच्च गुणवत्ता की जैविक खाद के रूप में भी इस्तेमाल होता है।

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