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हादसे में मेट्रो इंजीनियर का परिवार खत्म: शव देखकर रो पड़े बड़े भाई, नौ साल पहले स्टाफ क्वार्टर में रहने आए

दिल्ली के आदर्श नगर में डीएमआरसी के स्टाफ क्वार्टर्स में मंगलवार देर रात एक दर्दनाक घटना हुई। अपार्टमेंट की पांचवीं मंजिल पर लगी आग में असिस्टेंट सेक्शन इंजीनियर, उनकी पत्नी और बेटी की जलकर मौत हो गई। घटना के बाद पूरा परिवार शोक में है।

बाबू जगजीवन राम अस्पताल में परिजनों के साथ मौजूद मेट्रो अधिकारी भी अजय विमल की मौत के बाद गम में डूबे हैं। अधिकारियों ने बताया कि अजय विमल काफी मिलनसार व्यक्ति थे। उनकी मौत से सभी सदमे में हैं। वह परिवार के साथ इस सोसायटी में 2016 से रह रहे थे, तभी यह कॉलोनी बनी थी। सोसागटी में होने वाले कोई भी सामूहिक कार्यक्रम की जिम्मेदारी अजय ही संभालते थे। अधिकारियों ने बताया कि 2016 में उन्हें डीएमआरसी स्टाफ क्वार्टर आलॉट हुआ था। अजय विमल असिस्टेंट सेक्शन इंजीनियर थे। उनकी तैनाती बाराखंभा मेट्रो स्टेशन पर थी। उनकी बेटी क्वीन मैरी स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ती थी।

अधिकारी ने बताया कि डीएमआरसी इस चात का ध्यान रखती है कि उयूटी खत्म होने पर किसी भी कर्मचारी को अपने घर पहुंचने में किसी तरह की दिक्कत न हो। अजय विमल की साल 2006 में मेट्रो में नियुक्ति हुई थी। उनका परिवार मूलतः इटावा यूपी का रहने वाला है। उनके पिता दीनानाथ मध्य प्रदेश में निरीक्षक के पद से सेवानिवृत हुए थे। वह मध्य प्रदेश के उज्जैन में रहते थे। पिछले साल रक्षाबंधन के दिन उनका निधन हो गया था।

अजय की तीन बहने हैं। बड़ी बहन ऊषा और जीजा परिवार के साथ नोएडा में रहते हैं। मेट्रो अधिकारियों ने उन्हें इस दुखद घटना की सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही उनकी बहन परिवार के साथ यहां पहुंच गई। रविवार को ही वह अपने भाई से मिली थी। अधिकारियों ने बताया कि अजय के बड़े भाई मनीज यूपी पुलिस में इंस्पेक्टर हैं। वह हाथरस में कार्यरत हैं। मनोज अपने परिवार के साथ वहीं रहते हैं। अधिकारियों से पटना की जानकारी मिलने के बाद वह सीधा बाबू जगजीवन राम अस्पताल के मोर्चरी में पहुंचे। जहां भाई की शिनाख्त के दौरान वह फफक फफक कर रोने लगे।

डीएमआरसी हर संभव मदद करेंगे
हादसे के बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने बताया कि मृतक अजय विमल सहायक सेक्शन इंजीनियर (सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन) के पद पर कार्यरत थे। वह एक समर्पित और जिम्मेदार कर्मचारी थे। डीएमआरके ने पुलिस को हर संभव सहयोग देने की बात कही है और इस कठिन समय में शोक संतप्त परिवार के साथ खड़े होने का भरोसा दिलाया है। डीएमआरसी ने कहा कि यह हमारे परिवार के लिए गहरा आघात है। संगठन ने दिवंगत कर्मचारी और उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।

घटना के चश्मदीद ट्रक चालक सुखवीर सिंह ने बताया कि सोमवार रात डीएमआरसी सोसायटी के पीछे कंस्ट्रक्शन साइट पर ट्रक में रोड़ी लेकर आए थे।ट्रक खाली न होने की वजह से वह ट्रक में ही सो रहे थे। देर रात करीब 2.15 बजे तेज धमाके की आवाज सुनाई दी। उठकर देखा तो सामने सोसाइटी की एक फ्लोर से आग की लपटें निकलते दिखी। वह ट्रक से नीचे उतरकर सोसाइटी के गार्ड को घटना की जानकारी दी।

राजधानी दिल्ली में हर साल सर्दी के मौसम के साथ एक खामोश खतरा भी दस्तक देता है। ठंड से बचने के लिए घरों में जलने वाली अंगीठी, रूम डीटर और ब्लोअर कई बार जानलेवा साचित हो रहे हैं। विशेष बात यह है कि इन हादसों की बड़ी वजह कोई तकनीकी खराबी नहीं, चल्कि जानकारी और जागरूकता का अभाव है। थोड़ी सी लापरवाही पूरे परिवार की जिंदगी छीन ले रही है। रिटायर्ड गवर्नमेंट ऑफिसर डॉ. नकुल कुमार तरुण अपने संगठन के माध्यम से राजधानी में ऐसी लापरवाही को कम करने के लिए जागरूकता अभियान चला रहे हैं।

ये सावधानियां जरूरी
अंगीठी या कोयले का उपयोग बंद कमरे में कभी न करें
कमरे में कम से कम एक खिड़की या रोशनदान खुला रखें
अंगीठी बिल्कुल न जालाएं चाथरूम या छोटे बंद कमरे में
सोते समय हीटर/ब्लोअर बालू न छोड़ें
ठंड में खिड़की-दरवाजे पूरी
समय-समय पर ऑक्सीजन लेबल चोक करें
हीटर के पास कपड़े, रजाई. पर्दे, गद्दे आदि न रखें
हीटर से कम से कम 3 फीट की दूरी रखें

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