राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बड़े बदलाव के दौर से गुजर सकती है। यमुना पार सहित कई इलाकों से लगातार मिल रही बसों की अनुपलब्धता की शिकायतों ने सरकार को विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे में अब बड़ी 12-मीटर बसों के रूट पर देवी बसें यानी छोटी ई-बसें चलाने की तैयारी है। इससे यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेगा और बसों की किल्लत को आंशिक रूप से दूर किया जा सकेगा। हालांकि, देवी बसों को लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए संकरे क्षेत्रों में संचालित करने के लिए लाया गया है। यह बसें ऐसी जगहों पर चलाई जा रही हैं जहां पर डीटीसी की 12 मीटर लंबी बसें नहीं जा सकती हैं।
सूत्रों के अनुसार, सरकार इस दिशा में गंभीरता से विचार कर रही है और करीब 50 फीसदी देवी बसें बड़े रूटों पर तैनात करने का मॉडल तैयार किया जा रहा है। यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पूर्वी दिल्ली में बस रूटों के पुनर्निर्धारण के बाद से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। खासकर नई व्यवस्था को लेकर प्रचार-प्रसार की कमी और सड़कों से लगातार हट रहीं सीएनजी बसों के कारण दिक्कत आ रही है।
अधिकारियों ने बताया कि फ्लीट लगातार घटने और नई बसों की आपूर्ति में देरी को देखते हुए सरकार ऐसे वैकल्पिक उपयोग पर चर्चा बढ़ा रही है। देवी बसों को बड़े रूटों पर उतारने का विचार इसी रणनीति का हिस्सा है। इससे न केवल बसों की कमी को आंशिक रूप से पूरा किया जा सकेगा बल्कि यात्रियों को रूट पर बस की उपस्थिति का भरोसा भी मिल सकेगा।
देवी बसों के लिए बनाए जाएंगे बस स्टॉप
देवी बसों के लिए स्टॉप बनाए जाएंगे और रूट की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। देवी बसों की शुरुआत के बाद यात्रियों को उनके रूट की जानकारी नहीं मिल पा रही थी। इससे बसें चल तो रही हैं लेकिन अक्सर खाली रहती हैं। इस समस्या के समाधान के लिए परिवहन विभाग ने अब रूट बोर्ड लगाने का फैसला किया है। मौजूदा बस स्टैंडों पर देवी बसों की जानकारी तो उपलब्ध करा दी गई है लेकिन जहां बस स्टैंड नहीं हैं वहां दो खंभों पर बोर्ड लगाकर बस स्टॉप स्थापित किया गया है ताकि लोगों को इन बसों के बारे में जानकारी मिल सके। मौजूदा समय में राजधानी में डीटीसी और डीएमटीएस की ओर से संचालित 1,028 देवी बसें चल रही हैं।

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