तिहाड़ के खुले जेल में रहने वाले कैदी अब बंद जेल में रहेंगे। यह कैदी तिहाड़ के सेमी ओपन जेल में रहते थे, लेकिन जेल इमारत की जर्जर हालत को देखते हुए इन कैदियों की सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन ने यह कदम उठाया है। सेमी ओपन में रहने वाले 36 कैदियों को मंडोली जेल में भेज दिया गया है। मंडोली जेल सेमी ओपन नहीं है, इसलिए इन कैदियों को बंद जेल में रहने की व्यवस्था की गई है। हालांकि जेल प्रशासन ने मंडोली जेल नंबर 14 के अधीक्षक को इन कैदियों के लिए सारे इंतजाम करने के निर्देश जारी किए हैं।
इन कैदियों के रहने, वेतन, आने-जाने की सुविधा और मेडिकल की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि तिहाड़ के ओपन जेल में रहने वाले कैदी डर के साए में रह रहे थे। इसका कारण था जेल की इमारत का जर्जर होना। अकसर जेल के छत का हिस्सा इन पर गिर रहा था। कैदियों ने इसकी शिकायत जेल प्रशासन से की थी। उसके बाद लोक निर्माण विभाग ने जेल का निरीक्षण किया। उसमें जेल की इमारत को खतरनाक घोषित कर दिया गया और उसे रहने लायक नहीं बताया।
ऐसे में इस सेमी ओपन जेल में रहने वाले कैदी को तुरंत दूसरे जेल में शिफ्ट करने का फैसला लिया गया। साथ ही सेमी ओपन जेल के इमारत की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। इस जेल में रहने वाले 36 कैदियों की सारे रिकॉर्ड, सजा की फाइल, मेडिकल रिपोर्ट समेत अन्य जानकारी भी मंडोली जेल में भेज दिया गया है। मंडोली जेल में इन कैदियों को वह खुलापन नहीं मिल रहा है, जो तिहाड़ के सेमी ओपन जेल में मिल रहा था। हालांकि जेल प्रशासन जेल नियम के मुताबिक ही इन कैदियों को काम करवाने के निर्देश दिए हैं। जेल प्रशासन का कहना है कि इमारत की मरम्मत होने के बाद सभी कैदियों को सेमी ओपन जेल में शिफ्ट कर दिया जाएगा।
अच्छे आचरण वाले कैदी रहते हैं सेमी ओपन जेल में
तिहाड़ के सेमी ओपन जेल में अच्छे आचरण के साथ सजा भुगत रहे कैदियों को रहने की इजाजत है। यहां रहने वाले कैदी सजायाफ्ता होते हैं और जिनकी सजा दस या उससे अधिक साल का हो। साथ ही वह अपनी सजा का 75 फीसदी सजा अच्छे आचरण के साथ पूरी कर चुके हो। सेमी ओपन जेल में कैदियों को परिसर में बाहर निकलने की छूट होती है। सेमी ओपन में कैदी तिहाड़ परिसर के भीतर रहकर काम के सिलसिले में अपने बैरक से बाहर बेरोकटोक आ जा सकते हैं। वह तिहाड़ परिसर में स्थित कार्यालय, बैंक, रेस्तरां, तिहाड़ हाट कहीं भी आ-जा सकते हैं, लेकिन शाम पांच बजे तक उन्हें अपने बैरक में लौटना होता है।
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