ये दो स्टडी हर माता-पिता के लिए जरूरी: स्क्रीन टाइम बढ़ने से आंख ही नहीं रोती, बच्चों के दिमाग भी हो रहे खोखले
डॉक्टरों का कहना है कि अगर बच्चे में लंबे समय तक गुस्सा, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, पढ़ाई में गिरावट या व्यवहार में अचानक बदलाव दिखे, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय रहते मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेने से बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है।
स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों की न केवल आंखें रोने लगी हैं, जबकि दिमाग भी प्रभावित हो रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बच्चों में डिजिटल आई स्ट्रेन की समस्या बढ़ रही है। आंखों में जलन, सूखापन, सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना और आंखों का लाल होना आम लक्षण बनते जा रहे हैं। सिर्फ आंख ही नहीं बल्कि बच्चों का दिमाग भी स्क्रीन टाइम से प्रभावित हो रहा है। अतिरिक्त स्क्रीन टाइम बच्चों की एकाग्रता और यादाश्त पर असर भी असर डालता है।
नींद भी होती है प्रभावित
डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे जल्दी ही चिड़चिड़े हो जाते हैं, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लगते हैं। स्क्रीन पर दिखने वाली तेज रोशनी और लगातार बदलती तस्वीरें दिमाग को जरूरत से ज्यादा प्रभावित करती हैं, जिससे नींद की समस्या भी बढ़ रही है। पढ़ाई, मनोरंजन, जानकारी और संवाद जैसी हर जरूरत के लिए स्क्रीन का सहारा लेना आम बात हो गई है। ऑनलाइन कक्षाओं, वीडियो गेम, सोशल मीडिया और कार्टून देखने के चलते बच्चों का स्क्रीन टाइम तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन देखने से बच्चों की आंखों और दिमाग पर नकारात्मक असर पड़ रहा है, जिसका सीधा प्रभाव उनके व्यवहार पर देखने को मिलता है।
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