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भारत मंडपम रामकथा समापन: मोरारी बापू का विश्व शांति संदेश, रामनाथ कोविंद बोले- आध्यात्मिक चेतना से जागेगा समाज

भारत मंडपम में मोरारी बापू की नौ दिवसीय रामकथा का समापन हुआ। इस दौरान पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शामिल हुए। कथा में सनातन मूल्यों, सामाजिक समरसता और विश्व शांति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

भारत मंडपम में विश्व शांति मिशन के उद्देश्य से आयोजित पूज्य मोरारी बापू की नौ दिवसीय रामकथा का गरिमामय समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पत्नी के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने इस आयोजन को राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने वाला महत्वपूर्ण आध्यात्मिक प्रयास बताया।

इस अवसर पर अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के संस्थापक जैन आचार्य लोकेश मुनि ने मोरारी बापू के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह रामकथा विश्व शांति के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का ऐतिहासिक कार्य है। अहिंसा विश्व भारती संस्था के पदाधिकारियों ने भी बापू का सम्मान कर आभार प्रकट किया।

समापन कथा में मोरारी बापू ने कहा कि श्रीराम का जीवन सनातन मूल्यों की जीवंत पाठशाला है। राम के चरित्र से सत्य, करुणा, मर्यादा और सामाजिक समरसता के आदर्श स्थापित होते हैं। उन्होंने कहा कि रामकथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन में उतारने की प्रेरणा है।

पूरे नौ दिनों की कथा का मूल विषय मानस और सनातन धर्म रहा, जिसमें रामचरितमानस के माध्यम से आधुनिक समाज को दिशा देने वाले मूल्यों पर प्रकाश डाला गया। कथा के समापन के बाद मोरारी बापू, रामनाथ कोविंद और आचार्य लोकेश मुनि ने संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि आध्यात्मिक चेतना के बिना स्थायी शांति संभव नहीं है। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में यह समापन विश्व शांति के संकल्प की नई शुरुआत के रूप में देखा गया।

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