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Growth: प्रति व्यक्ति आय में इजाफा, राष्ट्रीय आय में भी हुई 10.2% की वृद्धि; विदेशी निवेश में 18 फीसदी उछाल

भारत में प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय बढ़कर 1,92,774 रुपये हुई। घरेलू बचत मजबूत होने से निवेश आधार मजबूत हुआ। एफडीआई में 18% की वृद्धि से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला। जानिए GDP और निवेश के ताजा आंकड़े...

देश में प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय वर्तमान में 1,92,774 रुपये आंकी गई है। शुद्ध राष्ट्रीय आय 271.44 लाख करोड़ रुपये है। यही नहीं, बचत के मोर्चे पर मजबूती दिखी है। इस कारण निवेश और पूंजी निर्माण के लिए घरेलू संसाधन आधार मजबूत हुआ है। आने वाले वक्त में कई देशों के साथ हुए व्यापार समझौते व घरेलू मांग के कारण निर्माण में बढ़ोतरी होगी। उपभोग व निर्यात में भी उछाल आने के आसार हैं।

जीडीपी के नवीनतम संशोधित आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान मूल्यों पर प्रति व्यक्ति निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के लिए क्रमशः 1,07,910 रुपये 1,17,356 रुपये और 1,27,627 रुपये आंका गया। वर्ष 2024-25 में वर्तमान मूल्यों पर शुद्ध राष्ट्रीय आय 271.44 लाख करोड़ है। यह 2023-24 के 246.25 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 10.2% की वृद्धि दर्शाती है। जबकि 2023-24 में यह वृद्धि दर 11.6% थी।

देश में प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय वर्ष 2022-23, 2023-24 के लिए क्रमशः 1,59,557 रुपये व 1,76,465 रुपये है। जहां तक बचत की बात है, तो वर्ष 2024-25 में सकल बचत 111.13 लाख करोड़ रुपये थी। 2024-25 में सकल बचत में प्रमुख हिस्सेदारी घरेलू क्षेत्र की 62.1% तथा गैर-वित्तीय निगमों की 28.9% है। वर्ष 2024-25 में वास्तविक सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में वृद्धि मुख्यतः विनिर्माण, खनन, निर्माण, वित्तीय सेवाएं तथा रियल एस्टेट, आवास स्वामित्व एवं व्यावसायिक सेवाओं में वृद्धि के कारण हुई। वर्तमान कीमतों पर सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (जीएफसीई) का अनुमान 2024-25 के लिए 33.95 लाख करोड़ रुपये है, जबकि वर्ष 2023-24 में यह 30.74 लाख करोड़ रुपये था।

वास्तविक जीडीपी 322.58 लाख करोड़ का अनुमान
वास्तविक जीडीपी या स्थिर कीमतों पर जीडीपी का स्तर वित्त वर्ष 2025-26 में 322.58 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। वर्ष 2024-25 के लिए जीडीपी का प्रथम संशोधित अनुमान (एफआरई) 299.89 लाख करोड़ रुपये था।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 18 फीसदी उछाल
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच चालू वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-दिसंबर अवधि में देश में 18 फीसदी अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया। एफडीआई प्रवाह का यह आंकड़ा बताता है कि वैशि्वक बाजार में चुनौतियों और कई देशों में तनाव के बीच विदेशी निवेशकों में भारत को लेकर भरोसा कामय है। सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-दिसंबर, 2025 में देश में 47.87 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी आया, जो सालाना आधार पर 18 फीसदी की वृद्धि को दर्शाता है।

वित्त वर्ष 2024-25 की समान अवधि में देश में 40.67 अरब डॉलर का एफडीआई आया था। 2025-26 के पहले नौ महीनों में देश कुल 73.31 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेश आया, जिसमें पुनर्निवेश आय भी शामिल है। अप्रैल-दिसंबर अवधि के दौरान सिंगापुर से सबसे ज्यादा एफडीआई आया, जबकि अमेरिका इस मामले में दूसरे स्थान पर रहा।  उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्तूबर-दिसंबर) में देश में 12.69 अरब डॉलर का एफडीआई आया, जो सालाना आधार पर 16.6 फीसदी अधिक है। एक साल पहले की समान अवधि में यह आंकड़ा 10.88 अरब डॉलर था।

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