अमेरिका-इस्राइल-ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष की वजह से बाजार बुधवार को बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए थे, लेकिन गुरुवार भारतीय शेयर बाजार में जोरदार खरीदारी देखने को मिली, जिसका मुख्य कारण बाजार में हाल ही में हुई गिरावट के बाद शॉर्ट कवरिंग रही है, जिसके बाद उछाल आया है। बाजार में ऐसी खबरें आ रही हैं कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ने पर सहमत हो गया है और वह अमेरिका को सशर्त प्रस्ताव दिए हैं। लेकिन जानकारों का कहना है, अभी कुछ भी कहा नहीं जा सकता है। परिस्थितियां काफी अनिश्चित बनी हुईं है, इसलिए कुछ भी कहना अभी जल्दबाजी होगी। जानकारों का कहना है, आगामी दिनों में बाजार सतर्क होकर एक तय रेंज में कारोबार करेंगे, जब तक कि मैक्रो इकोनोमिक सिग्नल या भू-राजनीतिक तनाव में कोई कमी नहीं आती।
गुरुवार को पेट्रोलियम कंपनियों के शेयरों में दिखा उछाल
उधर, निचले स्तरों पर मूल्य-खरीदारी और व्यापक बाजार में सुधार के बीच, तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में दो दिनों की गिरावट के बाद गुरुवार को उछाल आया। बीएसई पर हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के शेयर में 4.19 प्रतिशत की उछाल आई, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के शेयर में 1.19 प्रतिशत की वृद्धि हुई और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के शेयर में 0.59 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
पश्चिम एशिया में गहराते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बीच बुधवार को लगातार दूसरे दिन तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। चार दिनों की लगातार गिरावट के बाद, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 899.71 अंक या 1.14 प्रतिशत बढ़कर 80,015.90 पर बंद हुआ। दिन के दौरान, इसमें 1,187.64 अंक या 1.50 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 80,303.83 पर पहुंच गया।
50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 285.40 अंक या 1.17 प्रतिशत चढ़कर 24,765.90 पर बंद हुआ, जिससे लगातार तीन दिनों से जारी गिरावट का सिलसिला समाप्त हो गया। “वैश्विक बाज़ारों में सुधार और चुनिंदा बड़े शेयरों में खरीदारी के चलते गुरुवार को बाज़ारों में उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बीच तेज़ी आई और एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ कारोबार समाप्त हुआ। एशियाई बाज़ारों में मज़बूती और बड़े शेयरों में खरीदारी ने हाल के सत्रों में आई भारी गिरावट के बाद घरेलू शेयर बाज़ारों को ऊपर उठाने में मदद की,” रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, अनुसंधान, अजीत मिश्रा ने कहा।
हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का बने रहना प्रतिभागियों को सतर्क रहने के लिए मजबूर कर रहा है। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 2.19 प्रतिशत बढ़कर 83.18 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया। तेल की कीमतें, विदेशी कैपिटल आउटफ्लो से मार्केट पर होगा असर
कोटक सिक्योरिटीज के वीपी फंडामेंटल सुमित पोखरना ने अमर उजाला को बताया कि, भारत वैश्विक बाजारों से जुड़ा हुआ है, इसलिए किसी भी भू-राजनीतिक अनिश्चितता का असर भारत और भारतीय बाजारों पर पड़ेगा। मार्च के महीने में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गए हैं, क्योंकि एशिया में युद्ध बढ़ने से भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ी है और रिस्क ऑफ बायस शुरू (पूर्वाग्रह का जोखिम) हो गया है। वे कहते हैं, भारत के लिए यह युद्ध मुख्य रूप से तेल की कीमतों और विदेशी कैपिटल आउटफ्लो का है, जो बाजार पर सीधा असर डालेगा। वहीं लाखों भारतीय मध्य पूर्व में काम करते हैं, जिसका असर रेमिटेंस पर भी पड़ेगा।
आगामी दिनों में मार्केट में उतार-चढ़ाव बना रहेगा
सुमित कहते हैं, अगले 15 से 20 दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, फोकस कच्चे तेल के बढ़ते दामों और आपूर्ति पर होगा। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों पर भी ध्यान केंद्रीत करने की जरूरत है। ईरान के साथ अमेरिका और इजराइल के बीच युद्ध में तेजी और होर्मुन स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाने की ईरान की धमकियों ने जरूरी ग्लोबल एनर्जी चोकपॉइंट से तेल की आपूर्ति को लगभग रुक गई है। होर्मुन वैश्विक पेट्रोलिमय खपत और एलएनजी कारोबार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है, जिसमें ग्लोबल एनर्जी मार्केट के लिए कोई भी रुकावट बड़ी चुनौती हो जाती है।
वे कहते हैं भारत की स्थिति बेहद गंभीर है। भारत का लगभग 55 प्रतिशत आयात प्रभावित हुआ है, जिसमें कुल घरेलू गैस खपत में 28 से 29 प्रतिशत की कमी आई है। यह मामलू व्यवधान नहीं है, बल्कि आपूर्ति में भारी संकट को दर्शाता है। हमें उम्मीद है कि निकट भविष्य में औद्योगिक उपभोक्ता को गैस आपूर्ति में कटौती की जाएगी, जिसके बाद औपचारिक रूप से राशनिंग लागू की जाएगी। भारत के पास रणनीतिक गैस भंडार न होने के कारण भारत की स्थिति इस क्षेत्र में बेहद नाजुक है।
कोटक सिक्योरिटीज के हेड इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान कहते कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में तेजी से बढ़ोतरी ने ग्लोबल मार्केट में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है, और भारत भी कई तरीकों से इसका असर झेल रहा है। मध्य पूर्व में बड़े संघर्ष की संभावना, साथ ही कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से, जल्द ही निवेश का माहौल खराब होने की संभावना है। यह डेवलपमेंट ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय मार्केट पहले से ही काफी अधिक वैल्यूएशन और आईटी सर्विसेज एक्सपोर्ट और कंजम्प्शन पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के संभावित असर को लेकर चिंताओं से जूझ रहा है।
उन्होंने कहा, कि कच्चे तेल की कीमतें भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक स्टेबिलिटी के लिए ज्यादा जरूरी हैं। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इससे भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (कैड) बढ़ सकता है और बैलेंस ऑफ़ पेमेंट्स (BoP) और करेंसी पर दबाव पड़ सकता है। अनुमान बताते हैं कि कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत के कैड में लगभग 22 अमेरिकी डॉलर बिलियन जुड़ सकते हैं। इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट में रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट से सोने का आयात बढ़ सकता है और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (एफपीआई) फ्लो कमजोर हो सकता है, जिससे बाहरी बैलेंस पर और असर पड़ सकता है।
मार्केट के स्तर पर, कई सेक्टर में ऊंचे वैल्यूएशन से निराशा की गुंजाइश कम होती है। ग्लोबल अनिश्चितताओं और कई दूसरे उभरते मार्केट की तुलना में तेल की कीमतों में झटके लगने की वजह से भारतीय बाजार शॉर्ट टर्म में मार्केट परफॉर्मेंस को तुलनात्मक रूप से धीमा रह सकते हैं। विदेशी निवेशकों के सेंटिमेंट सतर्क रह सकते हैं और लंबे समय तक कमजोर रिटर्न घरेलू रिटेल पार्टिसिपेशन को भी कम कर सकता है।
बाजार सतर्क होकर एक तय रेंज में कारोबार करेंगे
वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने बताया, भारतीय इक्विट मार्केट मध्य पूर्व में बढ़ते भू-रानीतिक तनाव की छाया में कारोबार कर रहा है, जिसमें कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। एनर्जी की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई के आउटलुक पर दबाव बढ़ा रही हैं, जिससे निवेशकों की भावनाएं प्रभावित हुई हैं और वे सावधानी बरत रहे हैं। भारी एफपीआई की निकासी, घरेलू करेंसी पर और दबाव डाल रहा है, जिससे मार्केट का भरोसा कम हो रहा है। आने वाले दिनों में घरेलू बाजार में निवेशकों के सेंटिमेंट नाजुक बने रहेगे और वैश्विक तनाव यदि बढ़ता है तो वोलैटिलिटी के ऊंची बनी रहने की उम्मीद है। मेरा मानना है, बाजार सतर्क होकर एक तय रेंज में कारोबार करेगा। जब तक कि मैक्रा सिन्गल या भू-राजनीतिक तनाव में कोई कमी नहीं आती है।
जियोजित इंवेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेशक रणनीतिकार वीके विजयकुमार कहते हैं, मार्केट के नजरिए से युद्ध में दिक्कत यह है कि, तेल की जगहों पर हमले जैसी अचानक होने वाली घटनाएं मार्केट पर असर डाल सकती हैं। अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो मार्केट पर असर पड़ेगा। उनका कहना है, आनेवाले दिनों में युद्ध कितना बढ़ता है उसकों लेकर ही बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की उम्मीद है। इसमें निवेशकों को धीमी गति से अच्छी क्वॉलिटी वाले स्टॉक को खरीदन का अच्छा मौका है।
इन सेक्टर पर होगा सबसे ज्यादा असर
एयरलाइंस सेक्टर पर सबसे अधिक असर दिखेगा क्योंकि फ्यूल की कीमतें बढ़ने से इनकी मुनाफे पर असर होगा। दूसरा पेंटस, केमिकल्स और टायर्स पर असर के साथ ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टक के किरायो में वृद्धि होगी। जिसकी वजह से दैनिक उपभोग की वस्तुए (एफएमसीज) महंगी होगी और उनकी मांग पर असर पड़ेगा।
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