उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि पश्चिम एशिया में ऐसे हमलों पर रोक लगाई जानी चाहिए, जिनसे आम नागरिकों की मौत होती है। लावरोव ने कहा कि नागरिकों और नागरिक ढांचों को नुकसान से बचाना बेहद जरूरी है।
लावरोव ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई का जिक्र करते हुए इसके उद्देश्यों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि खुद अमेरिकी नेता भी स्पष्टतौर पर नहीं बता पा रहे हैं कि इन अभियानों का अंतिम लक्ष्य क्या है। उन्होंने दावा किया कि ईरान पर हमलों का एक मकसद फारस की खाड़ी के देशों के बीच और ईरान व उसके अरब पड़ोसियों के बीच विभाजन पैदा करना भी हो सकता है।
लावरोव ने कहा कि ‘लायंस रोवर’ और ‘एपिक फ्यूरी’ नाम से जारी इन अभियानों का असली मकसद क्या है, यह खुद अमेरिकी नेता भी नहीं बता पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें कोई शक नहीं है कि ईरान पर हमलों का एक लक्ष्य खाड़ी देशों को आपस में बांटना और ईरान व उसके अरब पड़ोसियों की बच दूरी बढ़ाना भी हो सकता है।
उनकी यह टिप्पणी उस समय आई है, जब पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं। शनिवार को अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के इलाके में संयुक्त सैन्य कार्रवाई की थी, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए थे। इसके बाद तेहरान ने जवाबी हमले तेज किए हैं।
ईरान ने कई अरब देशों में ड्रोन और मिसाइल हमले किए। यह संघर्ष अब 6वें दिन में प्रवेश कर चुका है। तेहरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इस्राइली ठिकानों को भी निशाना बनाया है। वहीं, इस्राइल ने भी तेहरान पर अपने हमले जारी रखे हुए हैं और संघर्ष का दायरा लेबनान तक बढ़ाते हुए हिजबुल्ला को निशाना बनाया जा रहा है। रूसी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि जिनेवा में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच हुई हालिया बातचीत सकारात्मक माहौल के साथ खत्म हुई थी। दोनों पक्ष कुछ समझौतों के करीब पहुंच गए थे। हालांकि, लावरोव ने आरोप लगाया कि बाद में अमेरिका ने यह कहना शुरू कर दिया कि ईरान उनकी शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा, यह एक रणनीति है।
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