व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने इस पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि ट्रंप ‘यूनिवर्सल मेल-इन वोटिंग’ के खिलाफ हैं, न कि उन व्यक्तिगत मामलों के जहां मतदाता को इसकी जरूरत होती है। वेल्स के अनुसार, ट्रंप जिस ‘सेव अमेरिका एक्ट’ का समर्थन करते हैं, उसमें बीमारी, विकलांगता, सेना या यात्रा जैसी स्थितियों में मेल से वोट देने की छूट दी गई है। उन्होंने कहा यूनिवर्सल मेल-इन वोटिंग की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि इसमें धोखाधड़ी की बहुत ज्यादा गुंजाइश होती है। उन्होंने कहा कि ट्रंप फ्लोरिडा के निवासी हैं लेकिन वे वाशिंगटन में रहते हैं, इसलिए उनका मेल से वोट देना कोई बड़ी बात नहीं है।
इसके बावजूद, ट्रंप ने पिछले हफ्त मेल-इन वोटिंग को धोखाधड़ी और बेहद भ्रष्ट बताया था। वे कांग्रेस से ‘सेव एक्ट’ पास करने का आग्रह कर रहे हैं ताकि मेल मतदान के विकल्पों को बहुत सीमित किया जा सके। हालांकि, ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन की 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, मेल मतदान में धोखाधड़ी के मामले न के बराबर हैं। रिपोर्ट बताती है कि हर एक करोड़ वोटों में से सिर्फ चार मामलों में ही गड़बड़ी पाई गई है।
सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने ट्रंप के इस कदम की आलोचना की है। शूमर ने कहा कि ट्रंप के अनुसार जब दूसरे लोग मेल से वोट दें तो वह ‘धोखाधड़ी’ है, लेकिन जब वे खुद ऐसा करें तो वह सही है। ट्रंप 2020 के चुनाव में अपनी हार के बाद से ही मेल मतपत्रों पर निशाना साध रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी अदालतों और उनके खुद के अटॉर्नी जनरल को चुनाव नतीजों को प्रभावित करने वाली किसी धोखाधड़ी का कोई सबूत नहीं मिला।
फ्लोरिडा के इस चुनाव में ट्रंप ने रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन मेपल्स का समर्थन किया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर लोगों से मेपल्स को वोट देने की अपील की थी, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि उन्होंने खुद मेल से वोट दिया है। ट्रंप के समर्थन के बावजूद जॉन मेपल्स चुनाव हार गए और डेमोक्रेट एमिली ग्रेगरी ने जीत हासिल की।
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