200 एमजीडी पानी अब भी नहीं मिल रहा
मंत्री ने कहा कि दिल्ली को करीब 1200 एमजीडी पानी की जरूरत है, जबकि सप्लाई लगभग 1000 एमजीडी ही हो रही है। इसके अलावा नॉन-रेवेन्यू वाटर लॉस 45 से 53 फीसदी तक पहुंच गया है, जो सिस्टम की बड़ी कमजोरी को दिखाता है। करीब 30 लाख घरों में नियमित जल कनेक्शन नहीं होने से समस्या और बढ़ रही है।
सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाई जाएगी
मंत्री ने कहा कि यमुना की सफाई का सबसे बड़ा रास्ता बिना ट्रीटमेंट वाले सीवेज को रोकना है। इसके लिए 35 नए और अपग्रेडेड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाएंगे और ट्रीटमेंट क्षमता 1500 एमजीडी तक बढ़ाई जाएगी। नजफगढ़ नाले समेत बड़े नालों का इन-सीटू ट्रीटमेंट भी योजना में शामिल है। उन्होंने दावा किया कि अगले 2 से 2.5 साल में ट्रीटमेंट क्षमता जरूरत से ज्यादा हो जाएगी। सीवर नेटवर्क को लेकर भी सरकार ने बड़ा लक्ष्य रखा है। अभी करीब 20 लाख घर इससे बाहर हैं। सरकार 1799 अनधिकृत कॉलोनियों तक सीवर लाइन पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है। पिछले एक साल में 180 किलोमीटर से ज्यादा नई लाइन बिछाई गई है और 400 से अधिक कॉलोनियों में काम जारी है। सेप्टिक टैंक सिस्टम में गड़बड़ियों को खत्म करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड नई पारदर्शी व्यवस्था ला रहा है। इसमें डिजिटल बुकिंग और अपने टैंकर शामिल होंगे।
जल बोर्ड को 4988 करोड़ का नुकसान
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने भी कैग रिपोर्ट के अहम बिंदु सदन में रखे। उन्होंने बताया कि जल नीति का अभाव, परियोजनाओं में देरी, भूजल प्रबंधन की कमी और करीब 4988 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान जैसे गंभीर मुद्दे सामने आए हैं। अध्यक्ष ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि रिपोर्ट पर तय समय में एक्शन टेकन नोट दें, ताकि संबंधित समितियां जांच शुरू कर सकें।
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