नीरज शुक्ला
फतेहपुर सीकरी। शहंशाह अकबर की राजधानी रही फतेहपुर सीकरी स्थित मुगलिया सल्तनत के महलों की सुरक्षा एवं जलापूर्ति के लिए उपयोगी रहे तेरह मोरी बांध को जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के कारण अनुपयोगी बनाकर रख छोड़ा गया है।
विश्वदाय स्मारक के अभिन्न अंग एवं जनपद की सबसे बड़ी जल संचय संरचना ‘पानी बिन सब सून ‘कहावत को चरितार्थ दर्शाती है। सिविल सोसायटी आप आगरा के सेक्रेटरी अनिल शर्मा, सदस्य राजीव सक्सेना एवं असलम सलीम ने तेरह मोरी बांध, पतसाल, पन चक्की , सिंगारपुर एवं चिकसाना क्षेत्र का भ्रमण करके प्रशासन से अपेक्षा की है कि तेरह मोरी बांध के स्ट्रक्चर को दुरुस्त करवा कर बांध के सभी गेटों का संचालित कराया जाए। वर्तमान में सभी गेट फेल हैं जो फंक्शन नहीं कर रहे हैं। सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा का मानना है। राजस्थान से उत्तर प्रदेश क्षेत्र का पानी मिलना बंद हो जाने के पश्चात बांध का लगभग 19 वर्ग किलोमीटर स्थानीय कैचमेंट एरिया को जल वाहिकाएं बनवाकर व्यवस्थित करवाया जा सकता है।
सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा के राजीव सक्सेना के अनुसार अकबर के समय में यह बांध बनाया गया था। राजस्थान की ओर से आने वाले पानी के अलावा स्थानीय जलग्रही क्षेत्र की बड़ी जल राशि बांध में पहुंचती रही है। वर्षा के दिनों में तेरह मोरी बांध पानी से लबालब होकर लोगों को आकर्षित करता रहा है। राजस्थान के अजान बांध से पानी का आना रुका हुआ है। अजान बांध की विजेंद्र सिंह मोरी से डिस्चार्ज होकर ही खारी नदी की शुरुआत होती है। यह एक प्राकृतिक जलवाहक संरचना है। सीकरी क्षेत्र के पाली पतसाल गांव होकर बंद तक पानी पहुंचता है।तेरह मोरी बांध का रखरखाव उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की तृतीय मंडल के अधिशासी अभियंता आगरा नहर के तहत आता है। जिम्मेदार अभियंता लापरवाह बने हुए हैं। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की उदासीनता भी उपेक्षा की बड़ी वजह रही है। वर्तमान में बांध के जल डूब के लिए उपयोग होने वाले भाग में खरीफ की खेती करवाई जा रही है। बांध क्षेत्र में जो भी जल राशि पहुंचती है वह बांध के गेट खराब होने एवं हित धारक पानी की निकासी कर डालते हैं। अति प्राचीनतम तेरह मोरी बांध के गेटों की मरम्मत एवं जल राशि का भंडारण जल संरक्षण एवं भूगर्भ के लिए अति महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
No Comments: